उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा पर बड़ा फैसला, बजट मद समाप्त, दीनी तालीम के साथ विज्ञान-गणित पढ़ना हुआ अनिवार्य
10 July 2026. Dehradun. उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने सूबे की अल्पसंख्यक शिक्षा प्रणाली को लेकर एक बेहद बड़ा प्रशासनिक और वित्तीय फैसला लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में वित्तीय वर्ष 2027-28 से “अरेबिया मदरसों को अनुदान” संबंधी बजट मद को पूरी तरह से समाप्त करने को मंजूरी दे दी गई है।
अब राज्य के सभी 452 पंजीकृत मदरसों को नए नियमों के दायरे में आना होगा और वहां दीनी तालीम के साथ-साथ विज्ञान और गणित जैसे आधुनिक विषयों को पढ़ना अनिवार्य होगा।
पुराना मदरसा बोर्ड हुआ भंग, नई व्यवस्था लागू
दरअसल, राज्य सरकार ने अल्पसंख्यक शिक्षा के सुदृढ़ीकरण और पुनर्गठन के लिए ‘उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम 2025’ और नई मान्यता नियमावली 2026 को लागू कर दिया है। इसके तहत ‘उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण’ का गठन किया गया है।
इस नई संस्थागत व्यवस्था के लागू होते ही, 1 जुलाई 2026 से पुराना मदरसा बोर्ड और उससे जुड़े पूर्व के अधिनियम पूरी तरह निरस्त हो चुके हैं। चूंकि पुराना बोर्ड अब अस्तित्व में नहीं है, इसलिए उसके तहत संचालित होने वाली पुरानी अनुदान व्यवस्था और बजट मद व्यावहारिक रूप से अप्रासंगिक हो गए थे, जिसे देखते हुए कैबिनेट ने इस मद को विलोपित करने की औपचारिक मंजूरी दे दी है।
रामनगर बोर्ड से लेनी होगी संबद्धता, पढ़ना होगा आधुनिक पाठ्यक्रम
इस ऐतिहासिक बदलाव के बाद अब मदरसों को सरकारी अनुदान और अन्य सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए दो चरणों से गुजरना होगा:
- सबसे पहले उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद (रामनगर) से संबद्धता (Affiliation) लेनी होगी।
- इसके बाद नए अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से विधिवत मान्यता प्राप्त करनी होगी।
अब सभी मदरसों में शिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित आधुनिक पाठ्यक्रम लागू करना अनिवार्य कर दिया गया है। मदरसे अपनी दीनी तालीम (धार्मिक शिक्षा) तो जारी रख सकेंगे, लेकिन अब उन्हें विज्ञान, गणित और सामाजिक विज्ञान जैसे विषय भी अनिवार्य रूप से पढ़ाने होंगे।
छात्र-हित और NEP 2020 के तहत लिया गया फैसला
सरकार का मानना है कि इस फैसले से अल्पसंख्यक समुदाय के छात्र मुख्यधारा की शिक्षा से जुड़ सकेंगे और उन्हें राज्य शिक्षा बोर्ड का वैध प्रमाणपत्र मिल सकेगा, जो उनके भविष्य और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा।
सरकार का रुख: यह पूरी कवायद राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के लक्ष्यों के अनुरूप शिक्षा में गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए है। सरकार ने आश्वस्त किया है कि इस नए नियमन का उद्देश्य केवल शैक्षणिक मानकों को बेहतर बनाना और छात्र-हितों की रक्षा करना है। इसके जरिए किसी भी अल्पसंख्यक संस्थान के आंतरिक प्रबंधन या स्वायत्तता में कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा।
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