मेलबर्न में पीएम मोदी: भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन में हुए बड़े समझौते, मार्वल स्टेडियम में प्रवासी भारतीयों को किया संबोधित
9 July 2026. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में आयोजित तीसरे ‘भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक शिखर सम्मेलन’ में भाग लिया। इस शिखर सम्मेलन की मेजबानी ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री माननीय एंथनी अल्बनीज ने की। गवर्नमेंट हाउस आगमन पर प्रधानमंत्री मोदी का पीएम अल्बनीज ने गर्मजोशी से स्वागत किया, जिसके बाद उन्हें ‘सेरेमोनियल वेलकम’ (औपचारिक स्वागत) दिया गया। दोनों नेताओं के बीच पहले आमने-सामने और फिर प्रतिनिधिमंडल स्तर की व्यापक बातचीत हुई।
व्यापक रणनीतिक साझेदारी के 6 साल पूरे, कई क्षेत्रों में बढ़ेगा सहयोग

दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) के सफल 6 वर्ष पूरे होने पर संतोष व्यक्त किया। बैठक के दौरान द्विपक्षीय संबंधों की प्रगति की समीक्षा की गई और कई प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति बनी, जिनमें शामिल हैं:
- व्यापार और निवेश
- रक्षा और सुरक्षा
- क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिज)
- साइबर और उभरती प्रौद्योगिकियां (Emerging Technologies)
- स्पेस और सिविल न्यूक्लियर (नागरिक परमाणु ऊर्जा)
- स्वच्छ ऊर्जा और शिक्षा
- लोगों से लोगों के बीच संबंध (People-to-People ties)
दोनों नेताओं ने आर्थिक साझेदारी के विस्तार की सराहना की और एक महत्वाकांक्षी, संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (CECA) को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने की प्रतिबद्धता दोहराई। इसके साथ ही, आज हुए ‘ऑस्ट्रेलिया-इंडिया सीईओ फोरम’ और ‘इकोनॉमिक बिजनेस रोडमैप’ के परिणामों का भी स्वागत किया गया।
यूरेनियम आपूर्ति का रास्ता साफ: 2014 के परमाणु समझौते को मिली हरी झंडी
इस यात्रा की एक सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि साल 2014 में हस्ताक्षरित ‘भारत-ऑस्ट्रेलिया नागरिक परमाणु समझौता’ (India-Australia Civil Nuclear Agreement) अब पूरी तरह से क्रियान्वित (Operationalise) हो गया है। इस कदम से अब ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम की निर्बाध आपूर्ति का रास्ता साफ हो गया है, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
तमिलनाडु की 3 ऐतिहासिक प्राचीन मूर्तियां लौटेंगी भारत
सांस्कृतिक आदान-प्रदान और संबंधों की गहराई को दर्शाते हुए, ऑस्ट्रेलियाई संस्थानों द्वारा भारत की कई प्राचीन सांस्कृतिक कलाकृतियों को स्वेच्छा से वापस करने के फैसले का स्वागत किया गया। तमिलनाडु मूल की ये कलाकृतियां जल्द ही भारत लाई जाएंगी, जिनमें शामिल हैं:
- पवित्र नंदी की एक पत्थर की मूर्ति
- भद्रकाली की छवि वाला एक धातु का त्रिशूल
- पत्थर से बनी भगवान कार्तिकेय की छह सिरों वाली मूर्ति
दोनों नेताओं ने एक स्वतंत्र, खुले और समृद्ध इंडो-पैसिफिक (हिंद-प्रशांत क्षेत्र) के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता को भी दोहराया। इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान समुद्री सुरक्षा, कौशल विकास, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, फिल्म निर्माण, सौर ऊर्जा और पारंपरिक ज्ञान जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कई समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए।
मेलबर्न के मार्वल स्टेडियम में प्रवासी भारतीयों का हुजूम, पीएम अल्बनीज भी हुए शामिल

शिखर सम्मेलन के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेलबर्न के भव्य मार्वल स्टेडियम में एक विशाल भारतीय समुदाय (Indian Diaspora) को संबोधित किया। इस कार्यक्रम की खास बात यह रही कि ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज भी विशेष रूप से पीएम मोदी के साथ इस प्रवासी भव्य आयोजन में शामिल हुए।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में गर्मजोशी से भरे स्वागत के लिए प्रवासी भारतीयों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने पीएम अल्बनीज की उपस्थिति और भारतीय समुदाय के कल्याण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के लिए उन्हें धन्यवाद दिया।
“भारत और ऑस्ट्रेलिया नेचुरल पार्टनर्स हैं”- पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा कि पिछले एक दशक में दोनों देशों के बीच साझेदारी ने नई ऊंचाइयों को छुआ है। दोनों अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की पूरक हैं, जो भारत और ऑस्ट्रेलिया को एक सुरक्षित, समृद्ध और लचीली साझेदारी के लिए ‘स्वाभाविक भागीदार’ (Natural Partners) बनाती हैं।
भारतीय प्रवासियों की तारीफ करते हुए पीएम मोदी ने उन्हें दोनों देशों के बीच का “लिविंग ब्रिज” (जीवंत सेतु) बताया। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलियाई समाज का अहम हिस्सा होने के बावजूद भारतीय समुदाय ने अपनी सांस्कृतिक परंपराओं को सहेज कर रखा है और यहां अपनी जीवंतता बिखेरी है। पीएम मोदी ने बढ़ते शैक्षिक सहयोग और भारत में ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों के कैम्पस खुलने का जिक्र करते हुए शिक्षा को इस रिश्ते का सबसे मजबूत स्तंभ बताया।
2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने का आह्वान
भारत की तीव्र प्रगति का खाका खींचते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश आज उच्च विकास दर, नीतिगत सुधारों, डिजिटल क्रांति और नेक्स्ट-जेनरेशन इंफ्रास्ट्रक्चर के दम पर आगे बढ़ रहा है। भारत आज कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग और ‘मेक इन इंडिया’ के तहत डिफेंस एक्सपोर्ट (रक्षा निर्यात) में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की लोकतांत्रिक ताकत, उसकी प्रतिभा और तकनीक दुनिया के लिए नए अवसर पैदा कर रही है। भारत सिर्फ अपनी प्रगति नहीं चाहता, बल्कि अपने मित्रों और भागीदारों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना चाहता है। अंत में, पीएम मोदी ने वहां मौजूद डॉक्टरों, इंजीनियरों, छात्रों, उद्यमियों और शोधकर्ताओं सहित लगभग 10 लाख की आबादी वाले भारतीय मूल के लोगों से साल 2047 तक ‘विकसित भारत’ के सपने को पूरा करने के लिए अपने विचारों और विशेषज्ञता के साथ योगदान देने का आह्वान किया।
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