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उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा परिणाम में भी दिखी राज्य की बर्बाद सरकारी शिक्षा व्यवस्था, पढ़िए

उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा परिणाम में भी दिखी राज्य की बर्बाद सरकारी शिक्षा व्यवस्था, पढ़िए

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by May 27, 2018 News

उत्तराखंड बोर्ड के 10 वीं और 12 वीं कक्षा के परिणाम घोषित हो चुके है जिसमे उधमसिंह नगर की कुमारी काजल प्रजापति ने 10 कक्षा में 98.40 प्रतिशत के साथ टॉप किया उसके बाद रोहित जोशी (98 प्रतिशत) के साथ दूसरे स्थान पर है और जतिन पुष्पन (97.80 प्रतिशत) के साथ तीसरे स्थान पर है। उत्तराखंड बोर्ड की 12 वीं कक्षा में उधम सिंह नगर की दिव्यंशी राज (98.04 प्रतिशत) के साथ प्रथम स्थान पर है उसके बाद उधम सिंह नगर से ही सचिन चंद (97.04 प्रतिशत) के साथ दूसरे स्थान पर है और नैनीताल के गर्वित कुमार (96.6 प्रतिशत) के साथ तीसरे स्थान पर है। इस साल उत्‍तराखंड बोर्ड की 10वीं की परीक्षाओं में 1,49,445 छात्र-छात्राओं और 12वीं की परीक्षाओं के लिए 1,32,381 छात्र-छात्राओं ने पंजीकरण कराया था।

ये बेहद चिंता का विषय है की उत्तराखंड बोर्ड परीक्षाओं में इस बार भी सरकारी स्कूलो के नतीजे निराशा जनक है। हाल यह है कि 12वीं और 10वीं के टॉप 10 में केवल एक सरकारी स्कूल के छात्र ने स्थान पाया है। हैरानी वाली बात यह भी है कि अपेक्षाकृत ज्यादा संसाधन-सुविधा वाले मैदानी जिलों के मुकाबले पहाड़ के छात्रों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। रिजल्ट देखकर साफ-साफ संदेश जा रहा है कि सरकारी शिक्षकों पर स्कूलों में शिक्षा में सुधार के बजाए हर वक्त सुगम-दुर्गम में तबादलों का रोना, वेतनमान, नई-नई छुट्टियों, प्रमोशन और इनके लिए धरने-प्रदर्शनों की चिंता ज्यादा हावी रही है। आज भी उत्तराखंड में अच्छे शिक्षकों और अच्छे शिक्षा संस्थानों की कमी है जिसके कारण अच्छी शिक्षा के लिए यहा के विद्यार्थियों को बाहर जाना पड़ता है उच्च शिक्षा की बात करें तो देहरादून के अलावा उंगलियों में गिनने लायक अच्छे शिक्षन संस्थान हैं और जो हैं वहां की शिक्षा का स्तर पूरी तरह से शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाने के लिए काफी है। इस समस्या को देखते हुए उत्तराखंड के आशीष डाबरल उत्साही छात्रों को सिखाने के लिए गुड़गांव से अपने गांव देवीखेत में सप्ताहांत के दौरान लगभग 720 किमी (लगभग 20 घंटे) यात्रा करते हैं। वैदिक शिक्षा को पुनर्जीवित करने और आधुनिक शिक्षा के साथ उन्हें लागू करने के दृष्टि से टिमली विद्यापाठ शुरू किया गया हैं। यह गढ़वाल हिमालय में एकमात्र संस्कृत विद्यालय था, जिसे संयुक्त प्रांत (ब्रिटिश सरकार) ने मान्यता दी थी। एक बार ऐसा समय था जब इस संस्कृत स्कूल में सैकड़ों छात्रों ने अध्ययन किया था।

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शिक्षा सभी के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। सफलता और सुखी जीवन प्राप्त करने के लिए जिस तरह स्वस्थ्य शरीर के लिए भोजन की आवश्यकता होती है, उसी तरह ही उचित शिक्षा प्राप्त करना बहुत आवश्यक है। जितना अधिक हम अपने जीवन में ज्ञान प्राप्त करते हैं, उतना ही अधिक हम अपने जीवन में वृद्धि और विकास करते हैं।

रियो ओलंपिक खिलाड़ी मनीष रावत, नितेन्द्र रावत, विश्व प्रसिद्ध अजीत डोभाल, ख़ुफिया एजेंसी रॉ के चीफ अनिल धस्माना, भारतीय कोस्ट गार्ड के डीजी राजेंद्र सिंह, आशीष डबराल, ममता रावत जिन्होने 2013 के उत्तराखंड बाढ़ में हजारों लोगों को बचाया था और शैलेश उप्रेती जिन्होने अमेरिका में सबसे लंबे समय तक चलने वाली बैटरी बनाने के लिए 34 करोड़ रुपये का पुरस्कार जीता था। यह वो भारतीय हैं जो अपने जीवन पर एक फिल्म के लायक हैं। जहां एक तरफ उत्तराखंड के होनहार लोग विश्व में अपना लोहा मनवा रहे है। वही ये समय है सोचने का कि उत्तराखंड बनने के 18 साल पूरे होने वाले हैं लेकिन राज्य की बुनियादी शिक्षा की नींव आज भी कमजोर है। गैरसैंण उत्तराखंड की राजधानी बने या ना बने मगर उत्तराखंड में शिक्षा संस्थान बनने चाहिए।


Nitish Joshi, Mirror News

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