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चार साल की मोदी सरकार, पढ़िए कहां पास और कहां फेल, क्या हैं चुनौतियां ?

चार साल की मोदी सरकार, पढ़िए कहां पास और कहां फेल, क्या हैं चुनौतियां ?

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by May 26, 2018 News

आज 26 मई से ठीक चार साल पहले दशकों में भारत की राजनीति में भारी बहुमत के साथ बीजेपी की नरेन्द्र मोदी सरकार सत्ता पर काबिज हुई थी, अन्ना हजारे और निर्भया जैसे आंदोलनों से विरोध के केन्द्र में रही उस समय की कांग्रेस की मनमोहन सरकार जब सत्ता से बुरी तरह गई तो तीन प्रमुख कारण सामने आए थे, पहला था बेरोजगारी और 10 साल का सत्ता विरोधी कारक, दूसरा भ्रष्टाचार था जो उस वक्त 2G और लोकपाल जैसे मुद्दों के कारण सुर्खियों में था और तीसरा कारण जो सामने आया था वो था महंगाई। उस समय बीजेपी की सरकार ने इन तीनों ही मुद्दों पर जम कर चुनाव लड़ा था, भ्रष्टाचार के तहत काले धन के मुद्दे पर काफी बयानबाजी होती थी, पॉलिसी पैरालिसिस और पाकिस्तान के सामने हाथ पर हाथ धरे बैठे रहना जैसे कारण भी सामने आए थे।

अब अगर बीजेपी की नरेन्द्र मोदी सरकार के कामकाज पर ध्यान दें तो पिछले चार साल में सत्ता तंत्र और मोदी की कोशिश ठोस फैसले लेने की दिखी, नोटबंदी से लेकर जीएसटी , रियल स्टेट कानून, डिजीटलीकरण कर प्रशासन और सुविधाओं में सुधार की कोशिश देखी गई। कश्मीर में आतंकियों को खत्म करने में कठोरता, पाकिस्तान के साथ उसी की भाषा में उलझना, सर्जिकल स्ट्राइक करना और काले धन को लेकर नियमों को सख्त करना जिसका बड़े लोगों से ज्यादा असर मध्यम तबके के कालाधन उपयोगकर्ताओं पर पड़ा और सीधा असर मजदूर वर्ग पर , जैसे कदम देखे गए। हर गांव में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य पूरा किया, स्वच्छ भारत मिशन से ज्यादा हालात न बदले हों पर मानसिकता और सोच में पहले से बदलाव है, उज्जवला योजना से गरीबों में खासकर महिलाओं में गैस बांटकर उनके दिल को छूने की कोशिश की , अगले साल गरीब परिवारों को पांच लाख के फ्री बीमा का भी सरकार वादा कर रही है, किसानों को फसलों की लागत का डेढ़ गुना दाम देने का फैसला लिया, सॉयल हैल्थ कार्ड, फसल बीमा जैसे कदम देखने को मिले हैं, हालांकि किसानों की हालत में अभी भी ज्यादा सुधार नहीं है, सबको घर देने का वायदा भी 2022 तक किया गया है, सड़कों की हालत बेहतर और पहले से ज्यादा निर्माण का दावा भी किया जा रहा है।

और अब सरकार के लिए एक साल बचा है, तेल की कीमतें काफी बढ़ रही है, जिसका असर दिन प्रतिदिन की महंगाई पर होता है, बैंकों के साथ धोखाधड़ी के मामले और उनकी जांच भी लोगों के सामने है, समाज के दलित और गरीब तबके में पहले की अपेक्षा मोदी सरकार को लेकर संतुष्टि कम है, मोदी सरकार पर धार्मिक आधार पर राजनीति करने का भी आरोप लगता है, बेरोजगारी की स्थिति ज्यादा नहीं सुधरी है, भ्रष्टाचार पर जरूर एक माहौल तैयार करने में सरकार सफल रही है, विपक्षी पार्टियां मोदी सरकार पर संविधान की धज्जियां उड़ाने, संस्थाओं पर अपने और आरएसएस के लोगों का प्रभाव रखने का आरोप भी लगाती हैं, योग और वैश्विक गोलबंदी में खुद पीएम मोदी को सक्रिय देखा गया ।

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