Skip to Content

Home / संस्कृति

इस सप्ताह का आपका राशिफल बता रही हैं नंदिता, टैरो कार्ड के जरिये सटीक जानकारी

अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित उत्तराखंड के समाचारों का एकमात्र गूगल एप फोलो करने के लिए क्लिक करें…. Mirror Uttarakhand News साप्ताहिक टैरो भविष्य फल  (  १९ सितम्बर  – २५ सितम्बर २०२० )  नन्दिता पाण्डेय  ऐस्ट्रोटैरोलोजर , आध्यात्मिक गुरु, लाइफ़ कोच    मेष ( २२ मार्च – २१ अप्रैल )     कार्य क्षेत्र में किसी ऐसे व्यक्ति की आपको मदद मिल सकती है जिनका समाज में एक रौबिला रुतबा हो एवं तुरंत निर्णय लेने की क्षमता रखते हों।…

Uttarakhand कुमाऊं में विरुड़-पंचमी से शुरू हुआ शिव-पार्वती पर श्रद्धा का पर्व, सातों-आठों के साथ होगा खत्म

उत्तराखंड शिव और पार्वती की भूमि है, हिमालय पुत्री पार्वती को यहां बेटी माना जाता है। एक ओर जहां आजकल नंदा रूपी पार्वती को शिव के घर कैलाश छोड़ने का उत्सव नंदा लोकजात या नंदा महोत्सव के रूप में मनाया जा रहा है तो वहींं कुमाऊंं के कुछ हिस्से में आजकल सातों आठों पर्व की तैयारी शुरू हो गई है। इस पर्व की शुरुआत विरुड़ पंचमी से होता है ।…

Uttarakhand हरेला पर्व मनाया, प्रकृति के सम्मान और संरक्षण को समर्पित है ये त्यौहार, जानिए इसके बारे में

आज गुरुवार को उत्तराखंड में हरेला पर्व मनाया गया, यह पर्व इंसान को प्रकृति का सम्मान और संरक्षण करना सिखाता है। मूल रूप से कुमाऊं में मनाए जाने वाले इस पर्व को कृषि से भी जोड़ा जाता है, पहाड़ों में खेती काफी विकट होती है और इस पर्व में भी उत्तराखंड के किसान की विकटता दिखती है। आइए आपको बताते हैं हरेला पर्व के बारे में…. यह पर्व वर्ष में…

उत्तराखंड का वो मंदिर जहां रहते हैं नाग, पुजारी को भी देखने की इजाजत नहीं, पढ़िये रहस्यमयी मंदिर के बारे में

हिमालय की गोद में सीमांत जनपद चमोली के देवाल ब्लाक में 8 हजार फीट की ऊंचाई में बसा बेहद खूबसूरत हिमालय का अंतिम गाँव है वाण गाँव। जहाँ विराजमान हैं सिद्ध पीठ लाटू देवता का पौराणिक मंदिर। बैशाख पूर्णिमा, 19 अप्रैल को लाटू देवता के कपाट आगामी 6 महीने के लिए आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिये जायेंगे। जिसके बाद श्रद्धालु 6 महीने तक लाटू देवता की पूजा अर्चना कर…

लॉकडाउन से पर्यावरण के घाव भर रहे हैं, पढ़िए विश्लेषण करता हुआ आलेख

नगरों में हिरनों का विचरण, माँ गंगा के जल का चांदी के समान स्वच्छ एवम प्रदूषण रहित होना अपने आप में मनुष्य को जीव जंतुओं एवम प्रकृति के साथ एकात्मक भाव से रहने के उस विसरित ज्ञान की पुनरावृत्ति कर पुनः स्थापित करने हेतु स्वम् प्रकृति द्वारा किये जाने वाली एक अनूठी प्रक्रिया का ही हिस्सा है। प्रकर्ति द्वारा मानवहित में यह स्वछता भरा अभियान कई स्वछता अभियानों की धज्जियां…

उत्तराखंड : खड़ी, बैठकी और महिला होली में रमे हुए हैं कुमाऊं के गांव और घर, होली के Video देखिए

उत्तराखंड ( Uttarakhand) के कुमाऊं में होली का त्यौहार एक अलग तरह से मनाया जाता है, जिसे कुमाऊँनी होली कहते हैं। कुमाऊँनी होली का अपना ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्त्व है। यह कुमाऊँनी लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण त्यौहारों में से एक है, क्योंकि यह केवल बुराई पर अच्छाई की जीत का ही नहीं, बल्कि पहाड़ी सर्दियों के अंत का और नए बुआई के मौसम की शुरुआत का भी प्रतीक है, जो इस उत्तर भारतीय…

Video देहरादून से चमोली तक होली में गांव-गांव में बज रहा है नरेंद्र सिंह नेगी का ये गीत, गढ़वाल में होली की धूम

उत्तराखंड में होली का पर्व पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है, जहां पहाड़ों पर पिछले कुछ हफ्तों से लगातार गांव गांव में हो रहा होली गायन अपने चरम पर आ गया है, वहीं मैदानी इलाकों में होलिका दहन के साथ होली के पर्व की शुरुआत हो गई है। कुमाऊं में जहां खड़ी होली, बैठकी होली और महिला होली के दौर जारी हैं, वहीं गढ़वाल में भी गांव गांव…

पढ़िए कैसे उत्तराखण्ड के सांस्कृतिक प्रतिनिधि हैं लोकोत्सव और मेले – डा. नंदकिशोर हटवाल

उत्तराखण्ड के सांस्कृतिक प्रतिनिधि हैं लोकोत्सव और मेले उत्सव, मेले और त्योहारों का मनुष्य के सामाजिक जीवन में अहम् स्थान होता है। वो किसी भी देश, धर्म, सम्प्रदाय में निवास करता हो लेकिन स्वभावतः मनुष्य उत्सव प्रेमी है। विभिन्न प्रकार के धर्म और सम्प्रदायों में विश्वास करते हुए पूरी दुनियां में मनुष्यों ने हजारों प्रकार के उत्सवों का सृजन किया। कुछ उत्सव खानपान, रहन-सहन के तौर तरीकों के साथ छोटे…

उत्तराखंड की केदारघाटी के गांवों में पांडव नृत्य, देवभूमि की अदभुत परंपरा को जानिए

आपने रामलीला या कृष्णलीला तो सुनी होगी, लेकिन क्या कभी आपने पांडव लीला के बारे में सुना है ? दरअसल उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों खासकर केदारघाटी में पांडव लीला का आयोजन किया जाता है। उत्तराखंड से पांडवों का गहरा रिश्ता रहा है, अपने वनवास के दौरान पांडवों को उत्तराखंड के जौनसार इलाके के राजा विराट ने शरण दी थी, वहीं जब पांडव अपने जीवन के अंतिम दौर में स्वर्ग की…

उत्तराखंड की पहचान है नथ/नथुली, आधुनिकता ने डिजाइन बदला पर परंपरा वही रही

देवभूमि उत्तराखंड का पहनावा पूरे देश में मशहूर है। अपनी परंपरागत वेशभूषा के लिए उत्तराखंड दुनिया भर में मशहूर है। महिलाएं रूप निखारने के लिए तरह-तरह के आभूषण शुरु से ही पहनती आई हैं। उत्तराखंड की महिलाओं को अलग पहचान दिलाने वाला और उनका रूप निखारने वाला, ऐसा ही एक आभूषण है उत्तराखंडी नथ, पहाड़ी नथ/नथूली जिसकी अपनी अलग ही पहचान है। जिस तरह से उत्तराखंड प्रदेश दो भाग गढ़वाल और…

1 2 5
Loading...