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उत्तराखंड की केदारघाटी के गांवों में पांडव नृत्य, देवभूमि की अदभुत परंपरा को जानिए

आपने रामलीला या कृष्णलीला तो सुनी होगी, लेकिन क्या कभी आपने पांडव लीला के बारे में सुना है ? दरअसल उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों खासकर केदारघाटी में पांडव लीला का आयोजन किया जाता है। उत्तराखंड से पांडवों का गहरा रिश्ता रहा है, अपने वनवास के दौरान पांडवों को उत्तराखंड के जौनसार इलाके के राजा विराट ने शरण दी थी, वहीं जब पांडव अपने जीवन के अंतिम दौर में स्वर्ग की…

उत्तराखंड की पहचान है नथ/नथुली, आधुनिकता ने डिजाइन बदला पर परंपरा वही रही

देवभूमि उत्तराखंड का पहनावा पूरे देश में मशहूर है। अपनी परंपरागत वेशभूषा के लिए उत्तराखंड दुनिया भर में मशहूर है। महिलाएं रूप निखारने के लिए तरह-तरह के आभूषण शुरु से ही पहनती आई हैं। उत्तराखंड की महिलाओं को अलग पहचान दिलाने वाला और उनका रूप निखारने वाला, ऐसा ही एक आभूषण है उत्तराखंडी नथ, पहाड़ी नथ/नथूली जिसकी अपनी अलग ही पहचान है। जिस तरह से उत्तराखंड प्रदेश दो भाग गढ़वाल और…

उत्तराखंड : यहां दशहरे में दो गांवों में होता है युद्ध, एक पुराने श्राप से मुक्ति के लिए करते हैं ऐसा

देश में जहां दशहरे के दिन रावण दहन की परंपरा है वहीं उत्तराखंड में एक स्थान ऐसा है जहां 2 गांव के बीच लड़ाई होती है। इस युद्ध के पीछे एक पुराना श्राप है, दोनों गांव के लोग इस शराब से मुक्ति के लिए दशहरे के दिन पूरी तैयारी के साथ युद्ध करते हैं। हम बात कर रहे हैं उत्तराखंड के जनजातीय क्षेत्र जौनसार बावर के उपाल्टा और कुरोली गांव…

नवरात्रि विशेष : देवभूमि में यहां मवेशियों की रक्षा के लिए देवी ने लिया झूलादेवी का रूप, दूर-दूर तक है मान्यता

देवभूमि उत्तराखण्ड सदैव ही देवों की तपोभूमि रहा है , इस कारण यह अटूट एंव अगाध आस्था का केन्द्र भी रहा है | नवरात्रों में मंदिरों में चहल पहल एंव भीड़ बढ जाती  है | रानीखेत के आसपास झूलादेवी, कालिका मंदिर , मनकामेश्वर मंदिर, पंचेश्वर मंदिर, शिव मंदिर आदि मंदिरों में भक्तों को भीड़ लगी रह रही है |  नवरात्रों में इन मंदिरों में एक प्रमुख स्थान मां झूला देवी…

सौंदर्य व एकता की प्रतीक देवभूमि के गाँवों की बाखलियां, खत्म होने के कगार पर

देवभूमि उत्तराखण्ड सदैव ही अपनी संस्कृति, सभ्यता, परंपरा एंव प्राकृतिक एंव आध्यात्मिक सौंदर्य के लिए विश्व विख्यात रहा है | यहाँ के गाँवों में परम्परागत एंव क्रमबद्ध निर्मित घरों को बाखलियाँ कहा जाता है , देवभूमि के ये परंपरागत घर बाखलियां सदैव ही एकता की वाहक रही हैं ।जिसमें एक ही आंगन से अनेक घर व परिवार जुड़े रहते हैं | पूर्व में इन्में अधिकाशतः संयुक्त परिवार निवास करते थे…

पढ़िए कैसे उत्तराखण्ड के सांस्कृतिक प्रतिनिधि हैं लोकोत्सव और मेले – डा. नंदकिशोर हटवाल

उत्तराखण्ड के सांस्कृतिक प्रतिनिधि हैं लोकोत्सव और मेले उत्सव, मेले और त्योहारों का मनुष्य के सामाजिक जीवन में अहम् स्थान होता है। वो किसी भी देश, धर्म, सम्प्रदाय में निवास करता हो लेकिन स्वभावतः मनुष्य उत्सव प्रेमी है। विभिन्न प्रकार के धर्म और सम्प्रदायों में विश्वास करते हुए पूरी दुनियां में मनुष्यों ने हजारों प्रकार के उत्सवों का सृजन किया। कुछ उत्सव खानपान, रहन-सहन के तौर तरीकों के साथ छोटे…

लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी को मिलेगा संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, मुख्यमंत्री ने घर जाकर बधाई दी

संगीत, नाटक, नृत्य, वादन एवं गायन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दिए जाने वाले पुरस्कार संगीत नाटक अकादमी की घोषणा हो गई है। इसमें गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी का नाम भी शामिल है। नरेन्द्र सिंह नेगी उत्तराखण्ड के गढवाल हिस्से के मशहूर लोक गीतकारों में से एक है। कहा जाता है कि अगर आप उत्तराखण्ड और वहाँ के लोग, समाज, जीवनशैली, संस्कृति, राजनीति, आदि के बारे में जानना चाहते…

पढ़िए हरिद्वार ही क्यों आते हैं कांवड़िए गंगाजल लेने, आज से शुरू हो गई कांवड़ यात्रा

आज से कांवड़ यात्रा की शुरुआत हो गई है, इस मौके पर पवित्र गंगाजल लेने शिवभक्त हरिद्वार पहुंचना शुरू हो गए हैं। इसको देखते हुए धर्मनगरी हरिद्वार में पूरी तैयारियां की गई हैं, सुरक्षा और व्यवस्था के स्तर पर पुलिस और प्रशासन की ओर से कावड़ियों की इस यात्रा को सुगम बनाने की पूरी कोशिश की जा रही है। दरअसल सावन में कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व है। मान्यता है…

इस सप्ताह का आपका राशिफल बता रही हैं नंदिता, टैरो कार्ड के जरिये सटीक जानकारी

साप्ताहिक टैरो भविष्य फल  (     १४ जुलाई    –  २० जुलाई    २०१९ )  नन्दिता पाण्डेय ऐस्ट्रोटैरोलोजर , आध्यात्मिक गुरु, लाइफ़ कोच  मेष ( २२ मार्च – २१ अप्रैल )     इस सप्ताह आपकी सेहत में ज़बरदस्त सुधार हो सकते हैं।आप भावनात्मक तौर पर जितना ख़ुश रहेंगे, आपकी सेहत भी उतनी ही बेहतर होती जाएगी। यात्राओं के लिए यह शुभ समय है एवं इनके द्वारा आपको सफलता भी अच्छी मिलेगी। परिवार…

जड़ों से जुड़े रहने की ललक, बेंगलुरु में आयोजित हुई कुमाऊंंनी और गढ़वाली संस्कृति की क्लास

उत्तराखंड की धरोहरों को बचाने के लिए बहुत से कार्य, सरकारी व गैर सरकारी संस्थाओं द्वारा हो रहे हैं । व्यक्तिगत व संस्थाएं भी इस मुहीम में ऐसे कार्यों में लगी हुई हैं । कुछ ऐसे ही कार्य उत्तराखंड महासंघ बेंगलुरु द्वारा इस शनिवार व रविवार को आयोजित किया गया। अपनी बोली भाषा व संस्कृति को आने वाली पीढ़ी से जोड़ने के लिए ईगल्स अनबाउंड में आयोजित पहाड़ी कनेक्ट कार्यक्रम…

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