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आज के ही दिन पेशावर में वीर चंद्र सिंह गढ़वाली ने दिया था अंग्रेजों को कड़ा जवाब, जानिए इस इतिहास को

वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली (25 दिसम्बर, 1891 – 1 अक्टूबर 1979) को भारतीय इतिहास में पेशावर कांंड के नायक के रूप में याद किया जाता है। २३ अप्रैल १९३० को हवलदार मेजर चन्द्र सिंह गढवाली के नेतृत्व में रॉयल गढवाल राइफल्स के जवानों ने भारत की आजादी के लिये लड़ने वाले निहत्थे पठानों पर गोली चलाने से मना कर दिया था। बिना गोली चले, बिना बम फटे पेशावर में इतना बड़ा धमाका हो…

इस सप्ताह का आपका राशिफल बता रही हैं नंदिता, टैरो कार्ड के जरिये सटीक जानकारी

साप्ताहिक टैरो भविष्य फल  (   21 अप्रैल     – 27  अप्रैल   २०१९ )  नन्दिता पाण्डेय  ऐस्ट्रोटैरोलोजर , आध्यात्मिक गुरु, लाइफ़ कोच    मेष ( २२ मार्च – २१ अप्रैल )     आर्थिक मामलों में उन्नति होगी एवं निवेश द्वारा फ़ायदे होंगे। इस मामले में इस सप्ताह कोई सकरात्मक समाचार आपको प्राप्त हो सकता है। इस सप्ताह की गयी यात्राओं द्वारा शुभ स्तिथियाँ बनती जाएँगी। परिवार में स्नेह बड़ेगा लेकिन…

उत्तराखंड का वो मंदिर जहां रहते हैं नाग, पुजारी को भी देखने की इजाजत नहीं, पढ़िये रहस्यमयी मंदिर के बारे में

हिमालय की गोद में सीमांत जनपद चमोली के देवाल ब्लाक में 8 हजार फीट की ऊंचाई में बसा बेहद खूबसूरत हिमालय का अंतिम गाँव है वाण गाँव। जहाँ विराजमान हैं सिद्ध पीठ लाटू देवता का पौराणिक मंदिर। बैशाख पूर्णिमा, 19 अप्रैल को लाटू देवता के कपाट आगामी 6 महीने के लिए आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिये जायेंगे। जिसके बाद श्रद्धालु 6 महीने तक लाटू देवता की पूजा अर्चना कर…

पहाड़ के रग-रग में बसी हुई है घुघुती, चैत के महीने से है विशेष लगाव, गीतों और लोककथाओं में घुघुती

घुघुती पक्षी उत्तराखंड के लोक में इस तरह से रची बसी है कि इसके बिना पहाड़ के लोक की परिकल्पना संभव नहीं है। घुघुती कि आवाज सुनने के लिए लोग तरस जाते हैं। एक बार जो घुघुती के सुरीली घुरून सुन ले वो कभी भी घुघुती को भूल नहीं सकता है। इसकी सुरीली आवाज को सुनने के लिए हर किसी का बार बार मन करता है। घुघुती को संदेश वाहक…

मां पूर्णागिरि धाम मेले का हुआ उद्घाटन, पहले दिन डेढ़ लाख के करीब भक्त पहुंचे, पढ़िए इस शक्तिपीठ के बारे में

उत्तर भारत के सुप्रसिद्ध मां पूर्णागिरि धाम में आज मेले का उद्घाटन हुआ, पहले दिन भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। पहले दिन करीब डेढ़ लाख से ज्यादा श्रद्धालु धाम पहुंचे। शुक्रवार रात 8 बजे से पूर्णागिरि मार्ग में भारी भीड़ के कारण जाम लगा रहा जो शनिवार दोपहर तक जारी था।  पूर्णागिरि माता का मंदिर उत्तराखंड में टनकपुर से 22 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, माँ पूर्णागिरि का मंदिर…

पढ़िए अपनी राशि के अनुसार कौन सा रंग खेलें, होली दे सकती है शुभ समाचार

हिन्दू धर्म में त्योंहारों का अपना विशेष महत्व होता हैं। जिसमें से एक है रंगों का त्योंहार अर्थात होली। कहते हैं न कि हर रंग कुछ दर्शाता है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार हर रंग किसी ना किसी राशि से जुड़ा हुआ हैं जो उस व्यक्ति के शुभ-अशुभ का निर्णय भी करता हैं। इसलिए होली खेलते समय अगर आप राशि के अनुसार रंग का चुनाव करें तो यह शुभ फलदायक होता हैं।…

मेरा बाजू रंगा रंग….पहाडी होली के रंग में रंगा सिलिकाॅन वेली बंगुलुरू, ढोल- दमाऊं की थापों पर जमकर थिरके उत्तराखंडी

पूरा देश होली के रंगों में रंगने को तैयार बैठा है। चारों ओर होली के रंगों की महक महसूस की जा सकती है। आखिर हो भी क्यों नहीं, रंगों का ये त्यौहार साल में एक बार ही तो आता है। अपनी माटी से दूर रह रहे उत्तराखण्डी प्रवासियों के संग़ठन उत्तराखंड महासंघ द्वारा सिलिकाॅन वेली बंगुलुरू में होली मिलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें सिलिकाॅन वेली भी पहाड़ी होली…

देखिये ‘ फूल देई ‘ का त्योहार अमेरिका में, परंपरा को यहां भी जीवित रखा है प्रवासी उत्तराखंडियों ने

उत्तराखण्ड के लोक पर्व ‘फूल देई छम्मा देई’ की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई। उत्तराखंड की धरती पर अलग-अलग ऋतुओं के अनुसार पर्व-त्योहार मनाए जाते हैं,ये पर्व एक ओर हमारी संस्कृति को उजागर करते हैं, तो दूसरी ओर प्रकृति के प्रति पहाड़ के लोगों के सम्मान और प्यार को भी दर्शाते हैं, इसके अलावा पहाड़ की परंपराओं को कायम रखने के लिए भी ये पर्व-त्योहार खास हैं। इस त्योहार को फूल…

उत्तराखंड में यहां पैदा हुए थे पांडव, राजा पांडु ने इस मंदिर में की थी तपस्या, जानिए इस जगह को

आज हम आपको उत्तराखंड के योगध्यान बद्री मंदिर के बारे में बताते हैं, ये वह जगह है जहां पांचो पांडव पैदा हुए थे, किंवदंती है कि पांडवों के पिता पांडू ने यहां पर काम क्रीड़ा मेंं लिप्त दो हिरणों को मारने का पश्चाताप किया था, जो पूर्व जन्म मेंं साधू थे और भगवान विष्णु की पूजा की थी। योगध्यान बद्री मंदिर हिन्दूओं के प्रसिद्ध व प्राचीन मंदिर में से एक है।…

गोलू देवता की कथा का तीसरा भाग, जब नवजात गोरिया को अपना सच पता चलने लगा

जैसा कि हम जानते हैं कि पिछले कुछ हफ्तों से हमने उत्तराखंड के देवी-देवताओं पर आपको लगातार जानकारी देने के लिए एक सीरीज शुरू की है, जिसमें हम आपको सबसे पहले उत्तराखंड में न्याय के लिए जाने जाने वाले गोलू देवता की जीवन कथा से परिचित करा रहे हैं । उत्तराखंड की दैव संस्कृति को करीब से जानने वाले भैरव जोशी आपको लगातार ये जानकारी दे रहे हैं । अभी…

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