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सौंदर्य व एकता की प्रतीक देवभूमि के गाँवों की बाखलियां, खत्म होने के कगार पर

देवभूमि उत्तराखण्ड सदैव ही अपनी संस्कृति, सभ्यता, परंपरा एंव प्राकृतिक एंव आध्यात्मिक सौंदर्य के लिए विश्व विख्यात रहा है | यहाँ के गाँवों में परम्परागत एंव क्रमबद्ध निर्मित घरों को बाखलियाँ कहा जाता है , देवभूमि के ये परंपरागत घर बाखलियां सदैव ही एकता की वाहक रही हैं ।जिसमें एक ही आंगन से अनेक घर व परिवार जुड़े रहते हैं | पूर्व में इन्में अधिकाशतः संयुक्त परिवार निवास करते थे…

पढ़िए कैसे उत्तराखण्ड के सांस्कृतिक प्रतिनिधि हैं लोकोत्सव और मेले – डा. नंदकिशोर हटवाल

उत्तराखण्ड के सांस्कृतिक प्रतिनिधि हैं लोकोत्सव और मेले उत्सव, मेले और त्योहारों का मनुष्य के सामाजिक जीवन में अहम् स्थान होता है। वो किसी भी देश, धर्म, सम्प्रदाय में निवास करता हो लेकिन स्वभावतः मनुष्य उत्सव प्रेमी है। विभिन्न प्रकार के धर्म और सम्प्रदायों में विश्वास करते हुए पूरी दुनियां में मनुष्यों ने हजारों प्रकार के उत्सवों का सृजन किया। कुछ उत्सव खानपान, रहन-सहन के तौर तरीकों के साथ छोटे…

लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी को मिलेगा संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, मुख्यमंत्री ने घर जाकर बधाई दी

संगीत, नाटक, नृत्य, वादन एवं गायन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दिए जाने वाले पुरस्कार संगीत नाटक अकादमी की घोषणा हो गई है। इसमें गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी का नाम भी शामिल है। नरेन्द्र सिंह नेगी उत्तराखण्ड के गढवाल हिस्से के मशहूर लोक गीतकारों में से एक है। कहा जाता है कि अगर आप उत्तराखण्ड और वहाँ के लोग, समाज, जीवनशैली, संस्कृति, राजनीति, आदि के बारे में जानना चाहते…

पढ़िए हरिद्वार ही क्यों आते हैं कांवड़िए गंगाजल लेने, आज से शुरू हो गई कांवड़ यात्रा

आज से कांवड़ यात्रा की शुरुआत हो गई है, इस मौके पर पवित्र गंगाजल लेने शिवभक्त हरिद्वार पहुंचना शुरू हो गए हैं। इसको देखते हुए धर्मनगरी हरिद्वार में पूरी तैयारियां की गई हैं, सुरक्षा और व्यवस्था के स्तर पर पुलिस और प्रशासन की ओर से कावड़ियों की इस यात्रा को सुगम बनाने की पूरी कोशिश की जा रही है। दरअसल सावन में कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व है। मान्यता है…

इस सप्ताह का आपका राशिफल बता रही हैं नंदिता, टैरो कार्ड के जरिये सटीक जानकारी

साप्ताहिक टैरो भविष्य फल  (     १४ जुलाई    –  २० जुलाई    २०१९ )  नन्दिता पाण्डेय ऐस्ट्रोटैरोलोजर , आध्यात्मिक गुरु, लाइफ़ कोच  मेष ( २२ मार्च – २१ अप्रैल )     इस सप्ताह आपकी सेहत में ज़बरदस्त सुधार हो सकते हैं।आप भावनात्मक तौर पर जितना ख़ुश रहेंगे, आपकी सेहत भी उतनी ही बेहतर होती जाएगी। यात्राओं के लिए यह शुभ समय है एवं इनके द्वारा आपको सफलता भी अच्छी मिलेगी। परिवार…

Video उत्तराखंड की केदारघाटी के गांवों में पांडव नृत्य, देवभूमि की अदभुत परंपरा

आपने रामलीला या कृष्णलीला तो सुनी होगी, लेकिन क्या कभी आपने पांडव लीला के बारे में सुना है ? दरअसल उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों खासकर केदारघाटी में पांडव लीला का आयोजन किया जाता है। उत्तराखंड से पांडवों का गहरा रिश्ता रहा है, अपने वनवास के दौरान पांडवों को उत्तराखंड के जौनसार इलाके के राजा विराट ने शरण दी थी, वहीं जब पांडव अपने जीवन के अंतिम दौर में स्वर्ग की…

जड़ों से जुड़े रहने की ललक, बेंगलुरु में आयोजित हुई कुमाऊंंनी और गढ़वाली संस्कृति की क्लास

उत्तराखंड की धरोहरों को बचाने के लिए बहुत से कार्य, सरकारी व गैर सरकारी संस्थाओं द्वारा हो रहे हैं । व्यक्तिगत व संस्थाएं भी इस मुहीम में ऐसे कार्यों में लगी हुई हैं । कुछ ऐसे ही कार्य उत्तराखंड महासंघ बेंगलुरु द्वारा इस शनिवार व रविवार को आयोजित किया गया। अपनी बोली भाषा व संस्कृति को आने वाली पीढ़ी से जोड़ने के लिए ईगल्स अनबाउंड में आयोजित पहाड़ी कनेक्ट कार्यक्रम…

आज के ही दिन पेशावर में वीर चंद्र सिंह गढ़वाली ने दिया था अंग्रेजों को कड़ा जवाब, जानिए इस इतिहास को

वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली (25 दिसम्बर, 1891 – 1 अक्टूबर 1979) को भारतीय इतिहास में पेशावर कांंड के नायक के रूप में याद किया जाता है। २३ अप्रैल १९३० को हवलदार मेजर चन्द्र सिंह गढवाली के नेतृत्व में रॉयल गढवाल राइफल्स के जवानों ने भारत की आजादी के लिये लड़ने वाले निहत्थे पठानों पर गोली चलाने से मना कर दिया था। बिना गोली चले, बिना बम फटे पेशावर में इतना बड़ा धमाका हो…

उत्तराखंड का वो मंदिर जहां रहते हैं नाग, पुजारी को भी देखने की इजाजत नहीं, पढ़िये रहस्यमयी मंदिर के बारे में

हिमालय की गोद में सीमांत जनपद चमोली के देवाल ब्लाक में 8 हजार फीट की ऊंचाई में बसा बेहद खूबसूरत हिमालय का अंतिम गाँव है वाण गाँव। जहाँ विराजमान हैं सिद्ध पीठ लाटू देवता का पौराणिक मंदिर। बैशाख पूर्णिमा, 19 अप्रैल को लाटू देवता के कपाट आगामी 6 महीने के लिए आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिये जायेंगे। जिसके बाद श्रद्धालु 6 महीने तक लाटू देवता की पूजा अर्चना कर…

पहाड़ के रग-रग में बसी हुई है घुघुती, चैत के महीने से है विशेष लगाव, गीतों और लोककथाओं में घुघुती

घुघुती पक्षी उत्तराखंड के लोक में इस तरह से रची बसी है कि इसके बिना पहाड़ के लोक की परिकल्पना संभव नहीं है। घुघुती कि आवाज सुनने के लिए लोग तरस जाते हैं। एक बार जो घुघुती के सुरीली घुरून सुन ले वो कभी भी घुघुती को भूल नहीं सकता है। इसकी सुरीली आवाज को सुनने के लिए हर किसी का बार बार मन करता है। घुघुती को संदेश वाहक…

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