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VIDEO देवेन्द्र के साथ ऊंचे पहाड़ों की ट्रैकिंग, और दर्शन करें ऐतिहासिक पिनाथ मंदिर के

VIDEO देवेन्द्र के साथ ऊंचे पहाड़ों की ट्रैकिंग, और दर्शन करें ऐतिहासिक पिनाथ मंदिर के

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by August 1, 2019 Tour/Travel

अल्मोड़ा और बागेश्वर की सीमा पर स्थित ऐतिहासिक पिनाथ मंदिर गेवाड़, बौरारौ और कत्यूर घाटी के सांस्कृतिक समागम का केंद्र रहा है। 2750 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस मंदिर में तीनों इलाकों के लोगों के लिए उनकी दिशाओं के अनुसार अलग-अलग दरवाजे बने हैं।

यहां से तीनों तरफ को काफी पुराने ट्रैकिंग रूट थे, जो अब लुप्त हो चुके हैं। पिनाथ में शिव और त्रिदेव के मंदिर का निर्माण 1638 और 1678 के बीच चंद वंशीय राजा बाज बहादुर चंद ने कराया था।

मंदिर का एक दरवाजा चौखुटिया की गेवाड़ घाटी को, एक सोमेश्वर की बौरारौ घाटी को और एक दरवाजा बागेश्वर की कत्यूर घाटी की तरफ खुलता है।

इन तीनों ही इलाकों के लोग कार्तिक पूर्णिमा पर यहां आते हैं और अपने-अपने इलाकों के दरवाजों से भीतर प्रवेश करते हैं। इन इलाकों से हो सकती है ।

ट्रेकिंग़ —बागेश्वर और गरुड़ क्षेत्र से पिनाथ तक आने के लिए कौसानी से काटली तक सड़क है। यहां से तीन किमी पर रूद्रधारी मंदिर है, रूद्रधारी से पिनाथ करीब 6 किमी जंगली मार्ग है। और पिनाथ से बुबा पिनाथ करीब 6 किमी होगा

( ट्रैकिंग का पूरा वीडियो अंत में देखें)

द्वाराहाट, चौखुटिया क्षेेत्र से घने सुंदर 14 किमी जंगल में ट्रैकिंग के लिए कुकूछीना से पांडवखोली, भटकोट होते हुए पिनाथ पहुंचा जा सकता है। बौरारो घाटी में लोद से चार किमी जंगल का रास्ता है। चट्टानों पर तराशी गई हैं 365 सीढियां। पिनाथ मंदिर तक चढ़ने के लिए 365 सीढ़ियां हैं। जिन्हेें चट्टानों को तराशकर बनाया गया है, सीढियों से पहले एक विशाल धर्मशिला रखी गई है।ऊंचाई पर हैं पानी के कुंए है, 27 सौ 50 मीटर की ऊंचाई पर पिनाथ में मंदिर के साथ ही दो कुएं भी बने हैं। इसके ठीक नीचे की तरफ चौखुटिया की तड़ागताल है, जो बारिश के बाद आधे साल तक पानी से लबालब भरी रहती है। और पिनाथ से बुडा पिनाथ के बीच का रास्ता रोमांच और साहसिक कार्यो के लिए आनन्दित कर देता है।

( ताजा समाचारों के लिए CLICK करें)

रूद्रधारी में रूद्रेशवर महादेब, पिनाथ मे पिनाथेश्वर महादेब और बुडा पिनाथ मै बृद्व पिनाथेश्वर महादेब बिराजमान है ,यहां पिनाथ और बुढा पिनाथ पर प्रसिद्व संन्त नान्तिन महाराज और रूद्रधारी मे हरिगिरी महाराज ने तपस्या की थी, ये महाराज वर्तमान में कौसानी के पास द्वारीकाधीश मंदिर पर बिराजमान है, काफी बृद्व हो चुकै है। दर्शन कर सकते है। हम लोगो द्वारा chalmora heritage welfare society का रजिस्ट्रेशन किया गया है।
जिसमें डी एम अल्मोडा ईवा आशीष जी का काफी सहयोग रहा है। डी एम अल्मोडा पदेन अध्यक्ष और जिला पर्यटन अधिकारी अल्मोडा आमंत्रित सदस्य है
और हर रविवार या महीने मे टूर आयोजित किया जाता है , हर बार टूर के लिए अलग अलग टीम लीडर का चुनाव होता है। आज का टूर दो दिन का रहा, बहुत ही अच्छी जगह और बहुत ही घना जंगल है, यहा पर बहुत विभिन्न प्रकार की चिडियां, बाज, जंगली भालु, तेदुंआ, हिरन, और जंगली सुअर के दर्शन हुए। सभी लोग टुर पर रोमांचित रहे, सुबह पांच बजे टूर पर हम लोग निकले थे और रात में सभी लोग करीब 9.30 पर काटंली गाव पर पहुचे, और वहीं पुजारी जी योगेश कांडपाल जी के घर पर ही सब लोग रूके, जो सुबह से शाम तक हमारे साथ थे, और उनके द्वारा पुजा और ट्रेकिंग में मार्गदर्शन भी किया, और आज के टूर मै chalmora heritage welfare society के संस्थापक सदस्यो में बिपिन जोशी, तनिषा तिवाडी, देबेन्द्र बिनवाल, बीरेन्द्र पथनी, दीवान सिह पुना, राकेश रैक्युनी और टूर पर सहभागिता बिनीता तिवाडी, आगुन्तक बर्मा, योगेश हिमाशुं, अरबिन्द और राजकीय महिला पॉलिटेक्निक के प्रवक्ता श्री आईडी तिवाडी, और इस टुर के ग्रुप के लीडर ट्रेकिगं के अनुभवीप्राप्त और निम उतरकाशी से प्रशिक्षण प्राप्त राकेश रैक्युनी थे, टूर का वीडियो देखें………

https://m.youtube.com/watch?


देवेन्द्र बिनवाल, Mirror

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