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बच सकते थे मेजर विभूति ढोंडियाल, अगर उन्होंने अपने एक कुमाऊंंनी फौजी की बात सुनी होती

बच सकते थे मेजर विभूति ढोंडियाल, अगर उन्होंने अपने एक कुमाऊंंनी फौजी की बात सुनी होती

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by February 20, 2019 All, News

जम्मू कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ की एक बस में किए गए आत्मघाती हमले में 40 जवानों को शहीद करने वाले आतंकियों को खत्म करने वाले उत्तराखंड के मेजर विभूति ढोंडियाल इस ऑपरेशन के दौरान आतंकियों को मारकर शहीद हो गए थे। मंगलवार को उनका देहरादून में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया, वो 55 आरआर में तैनात थे और जम्मू कश्मीर के पुलवामा इलाके में हाल के दिनों में आतंकियों के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन में काफी सक्रिय रहे।

पुलवामा में सीआरपीएफ की बस पर हुए हमले के बाद इस हमले के लिए जिम्मेदार आतंकियों की खोज लगातार चल रही थी और पता लगा कि इस हमले के लिए जिम्मेदार और इसका मास्टरमाइंड पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन जैश ए मोहम्मद का आतंकवादी कामरान गाजी है जो पुलवामा और उसके आस-पास ही कहीं छिपा हुआ है। जैश ए मोहम्मद कश्मीर में सक्रिय आतंकवादी संगठन है जिसका मुखिया पाकिस्तान में रहने वाला मसूद अजहर है ये वही मसूद अजहर है जिसको भारत ने कंधार विमान अपहरण के बाद छोड़ा था।

रविवार रात को पता चला कि कामरान गाजी अपने कुछ साथियों के साथ पुलवामा के पिंगलान गांव में छुपा हुआ है, नजदीक ही मेजर ढोंडियाल अपनी कंपनी के साथ तैनात थे । जिस वक्त में उन्हें ये सूचना मिली उस वक्त वो खाना शुरू कर रहे थे, लेकिन उन्होंने खाना छोड़ दिया और वह निकल पड़े गाजी को निपटाने। आरआर में ही तैनात कुमाऊँ रेजीमेंट के एक सैनिक ने मेजर को कहा कि अच्छा होगा कि वो खाना खाकर निकलेंं, तब तक उनकी मदद के लिए पैरा कमांडोज भी गांव में पहुंच जाएंगे। लेकिन विभूति ने ये बात नहीं मानी । दरअसल उनके दिल में पुलवामा हमले के बदले की आग जल रही थी और कामरान गाजी का नाम सुनते ही वो उसको निपटाने के लिए निकल पड़े।

घटनास्थल पर जाकर उन्होंने कुछ पैरामिलिट्री और जम्मू कश्मीर एसओजी के साथ मिलकर कामरान को घेर लिया, मेजर विभूति कामरान गाजी के साथ आमने-सामने की फायरिंग में मौजूद थे, गाजी और उसके दो आतंकवादियों की गोलीबारी में विभूति के गले में गोली लग गई, लेकिन उसके बाद भी वो नहीं हटे और उन्होंने कामरान के सर में गोली मार दी, गाजी वहींं निपट गया, लेकिन अभी दो आतंकवादी और बचे हुए थे।

तब तक घटनास्थल पर पैरा कमांडोज और दूसरे सुरक्षा बल पर पहुंच चुके थे, उन्होंने मोर्चा संभाल लिया और मेजर विभूति को अस्पताल के लिए रवाना किया। कामरान गाजी के साथ के बाकी आतंकवादी भी मारे गए, 3 जवान भी शहीद हुए, मेजर विभूति ने अस्पताल में दम तोड़ दिया, लेकिन भारतीय सेना ने पुलवामा में शहीद 40 सीआरपीएफ जवानों का बदला ले लिया और मेजर विभूति की बहादुरी भारतीय सेना के बलिदान और पराक्रम के पन्नों में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गई ।

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Mirror News

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