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उत्तराखंड शिक्षा व्यवस्था का दुर्भाग्य, कुमाऊं के ऐतिहासिक कॉलेजों को नहीं मिल रहे छात्र

उत्तराखंड शिक्षा व्यवस्था का दुर्भाग्य, कुमाऊं के ऐतिहासिक कॉलेजों को नहीं मिल रहे छात्र

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by April 21, 2019 News

भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत, थल सेनाध्यक्ष बिपिन चंद्र जोशी, कवि सुमित्रानंदन पंत और भाजपा नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने जिन विद्यालयों से मैट्रिक और इंटर किया, उनमें पढ़ने के लिए आज छात्र नहीं मिल रहे हैं,  इसे उत्तराखंड में निजी स्कूलों की सरकारी स्कूलों पर जीत और शिक्षा व्यवस्था का दुर्भाग्य नहीं कहेंगे तो क्या कहेंगे ।

आपको बता दें कि 1 अप्रैल से राज्य में सरकारी स्कूलों में प्रवेश प्रारंभ हो गया है और अल्मोड़ा के ऐतिहासिक इंटर कॉलेज रैमजे इंटर कॉलेज और जीआईसी अल्मोड़ा को लेकर जो रिपोर्ट आ रही है वो चिंता पैदा करने वाली है। अभी कुछ ही साल पहले की बात है जब अल्मोड़ा के रैमजे इंटर कॉलेज में एडमिशन मिलना काफी मुश्किल होता था और जीआईसी अल्मोड़ा में कक्षा 6 के 4 – 4 सेक्शन चलते थे । लेकिन आज लोगों का रुख निजी स्कूलों की तरफ इतना बढ़ गया है कि हिंदुस्तान अखबार की एक रिपोर्ट के अनुसार ऐतिहासिक रैमजे इंटर कॉलेज में अब तक कक्षा 6 में सिर्फ 6 एडमिशन हुए हैं और वहीं जी आई सी अल्मोड़ा में कक्षा 6 में सिर्फ 21 एडमिशन हुए हैं । जीआईसी अल्मोड़ा में अंग्रेजी माध्यम से भी कक्षाएं शुरू की गई हैं लेकिन उसमें अभी तक सिर्फ 5 एडमिशन हो सके हैं, आज आलम यह है कि इन कॉलेजों के शिक्षक शहर और दूसरे इलाकों में एडमिशन के लिए पॉम्पलेट बांट रहे हैं । आपको बता दें कि रैमजे इंटर कॉलेज और जीआईसी अल्मोड़ा कुमाऊं के सबसे पुराने कॉलेज हैं।

रैमजे इंटर कॉलेज, 1871

रैमजे इंटर कॉलेज 1871 में शुरू हुआ था जबकि जीआईसी अल्मोड़ा को 1891 में शुरू किया गया था। भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत ने अपनी पढ़ाई रैमजे इंटर कॉलेज से की थी।

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