
उत्तराखंड के कई इलाकों में हो रही है पानी की किल्लत, त्रिवेन्द्र सरकार ने अब उठाया है ये कदम
जैसे -जैसे गर्मी का मौसम अपने उफान पर आ रहा है उत्तराखंड के कई पहाड़ी और मैदानी इलाकों में पानी की किल्लत शुरू हो गई है। गांव-घरों में जहां इस किल्लत को दूर करने के लिए लोग प्राकृतिक श्रोतों पर निर्भर हैं जो मौसम के साथ ही अब सूखते जा रहे हैं तो वहीं शहरी इलाकों में ये समस्या कुछ जगहों पर विकराल रूप धारण कर चुकी है। उत्तराखंड जल संस्थान 39360 बस्तियों में पेयजल उपलब्ध करवाता है। इनमें से 22312 बस्तियों में जलापूर्ति ठीक है लेकिन 17406 में आंशिक रूप से ही पेयजल आपूर्ति हो रही थी। सालभर के प्रयासों के बाद आंशिक रूप से 374 बस्तियों का ही पेयजल संकट दूर हो पाया। शेष 17032 की स्थिति आज भी वैसी ही है, जैसी पिछले साल थी। इन बस्तियों में गर्मियों में लोगों को अकसर पेयजल की किल्लत का सामना करना पड़ता है। इस बार मौसम का जैसा रुख है, उसे देखते हुए इन 17 हजार से अधिक बस्तियों में पेयजल संकट गहराना तय माना जा रहा है।
उत्तराखंड में हर साल होने वाली पानी की इस विकराल समस्या से निपटने के लिए अब राज्य सरकार ने कुछ विशेष कदम उठाए हैं। उत्तराखंड सरकार ने जल संस्थान से जुड़े सबी अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं वहीं बुधवार को देहरादून से ‘ जल संचय, संरक्षण-संवर्द्धन अभियान’ की शुरुआत की, इस मौके पर एक मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने जल संरक्षण की जागरूकता के लिए ‘जल चेतना रथ’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि “जल संकट की चुनौती से लड़ने के लिए विशेष प्रयासों की जरूरत है। आने वाले समय में जल संकट विश्व के समक्ष एक गम्भीर समस्या होगी। जल के संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए हमें अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक सोच के साथ कार्य करना जरूरी है, इस वर्ष लगभग 200 करोड़ रूपये जल संग्रहण एवं उससे सम्बन्धित योजनाओं पर खर्च किये जायेंगे। सरकारी आवासों से रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की शुरूआत की जा रही है। ”
इस मौके पर उत्तराखंड के पेयजल मंत्री प्रकाश पंत ने कहा, ” पेयजल की समस्या के छुटकारा दिलाने के लिए विश्व बैंक पोषित अर्द्धनगरीय क्षेत्र के रूप में प्रदेश के सात जनपदों में चिंहित किए हए 35 अर्द्धनगरीय क्षेत्रों के लिए मानक के अनुरूप पेयजल उपलब्ध कराने के लिए कार्यक्रम शुरू किया गया है। वर्ष 2022 तक हर घर में शुद्ध पानी पहुंचाने के लिए शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों के लिए योजनाए बनाई जा रही हैं।”
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कुल मिलाकर सरकार की कोशिश वर्षा जल को संचित कर पानी की किल्लत को दूर करने की है तो वहीं विस्व बैंक जैसी संस्थाओं से मिलकर सरकार घरों तक पीने का पानी पहुंचाना चाहती है लेकिन इस योजना को परिणाम देने में समय लग सकता है ऐसे में राज्य सरकार और जल संस्थान को इस बार राज्य में पानी की किल्लत को दूर करने और लोगों के गुस्से को शांत करने में काफी मशक्कत करनी पड़ सकती है। हालांकि वर्षा जल संचय अगर सरकार और जनता के स्तर पर किया जाए तो इससे ये समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है लेकिन इसके लिए लोगों को वर्षा जल संचय की तकनीकी जानकारी होना काफी जरूरी है।
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Mirror News
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