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बॉलीवुड फिल्मों में पहाड़ तो काफी दिखता है पर उत्तराखंड का स्थानीय सिनेमा कहां गया

बॉलीवुड फिल्मों में पहाड़ तो काफी दिखता है पर उत्तराखंड का स्थानीय सिनेमा कहां गया

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by January 5, 2019 cinema/Lifestyle

बॉलीवुड की फिल्मों की शूटिंग के लिए उत्तराखंड पसंदीदा जगह रही है। जैसा कि हम जानते हैं, प्रकृति ने उत्तराखंड को अपनी सुंदरता से सुशोभित किया है, जिसके परिणामस्वरूप यहाँ पर पर्यटक न केवल उत्तराखंड के विभिन्न कोनों से बल्कि विदेशों से भी घूमते आते हैं। बॉलीवुड के लिए नैनीताल, मसूरी, रानीखेत, कौसानी, केदारनाथ, अल्मोड़ा, बागेश्वर, औली, फूलों की घाटी, चमोली आदि फिल्म की शूटिंग के प्रमुख स्थान रहे हैं। विवाह, बाज़, सिर्फ तुम, स्टुडेंट ऑफ द ईयर, किसना, केदारनाथ, पान सिंह तोमर, लक्ष्य जैसी बड़ी बॉलीवुड फ़िल्में भी उत्तराखंड में शूट की जा चुकी हैं। ज़रूरत है सिनेमा में बदलाव की ओर छोटे शहरों के अच्छे कलाकारो को अवसर प्रदान करने की जिससे फ़िल्मे सामाजिक संदेश दे।

फ़िल्मे ऐसी होनी चाहिए जो हमारे देश के बहादुर जवानो को समर्पित हो या फिल्मों में उन लोगो के बारे में दिखाया जाए जिन्होने भारत देश का नाम दुनिया में रोशन किया हो जिससे युवा पीढ़ी को एक सकारात्मक प्रेरणा मिले। उदाहरण के लिए ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके चमोली जिले के मनीष रावत, दिल्ली हाफ मैराथन में नेशनल रिकॉर्ड विजेता नितेन्द्र रावत, विश्व प्रसिद्ध 007 अजीत डोभाल, ख़ुफिया एजेंसी रॉ के नए चीफ अनिल धस्माना, तटरक्षक बल के प्रमुख राजेंद्र सिंह, DGMO अनिल भट्ट, रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्विनी लोहानी,  जिन्होने वर्ष 1979 में सिर्फ 21 साल की उम्र में मेकैनिकल, इलेक्ट्रिकल, मेटलर्जिकल और टेलीकम्युनिकेशन में इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त कर ली थी जिसके लिए उनका नाम लिम्का बुक रिकॉर्ड्स में दर्ज है। 17 वें सेनाध्यक्ष स्वर्गीय जनरल बिपिन चंद्र जोशी, 27 वें सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत, 1962 के युद्ध में शहीद होने वाले सैनिक जसवंत सिंह रावत, 1999 कारगिल शहीद कैप्टन मनोज कुमार पांडेय, भारतीय नौसेना के 21 वें नौसेनाध्यक्ष एडमिरल देवेन्द्र कुमार जोशी, कैप्टन वर्तिका जोशी, सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी, आशीष डबराल, रुद्रप्रयाग के डीएम मंगेश घिल्डियाल, हरिद्वार के डीएम दीपक रावत, पौड़ी गढ़वाल निवासी उत्तराखंड की प्रथम सिविल सेवा परीक्षा 2012 में 83वीं रैंक हासिल करने वाली वंदना पोखरियाल, ममता रावत जिन्होने 2013 के उत्तराखंड बाढ़ में हजारों लोगों को बचाया था और उत्तराखंड में जन्मे वैज्ञानिक शैलेश उप्रेती जिन्होने अमेरिका में सबसे लंबे समय तक चलने वाली बैटरी बनाने के लिए 34 करोड़ रुपये का पुरस्कार जीता था। यह वो भारतीय हैं जो अपने जीवन पर एक फिल्म के लायक हैं।

उत्तराखंड  का सिनेमा  से पुराना नाता  रहा है। उत्तराखंड सिनेमा का इतिहास 1981 की गढ़वाली फिल्म से शुरू होता है। उत्तराखंड  राज्य की प्रथम फिल्म निर्माता पारेश्वर गौड़ द्वारा निर्मित है साल 1983 में आई पहली गढ़वाली फिल्म जग्वाल काफी लोकप्रिय रही। जग्वाल एक गढ़वाली शब्द है जिसका अर्थ है द लॉन्ग वेट। यह एक पारिवारिक मेलोड्रामा है जो एक युवा महिला के इर्द-गिर्द घूमती है व उत्तराखंड की पहली कुमाउँनी फिल्म मेघा आ भी नब्बे के दशक में काफी लोकप्रिय रही थी। विश्वेश्वर दत्त नौटियाल द्वारा निर्मित सन 1985 में बनी एक ओर गढ़वाली फिल्म “घर जैवे” दिल्ली के संगम सिनेमा हाल में लगातार 29 सप्ताह तक चली थी। यह 35MM की एकमात्र सर्वाधिक सफल गढ़वाली फिल्म रही है। 1981 से 2018 तक कुल 58 गढ़वाली बोली की और 4 कुमाऊँनी बोली की ही फ़िल्मे प्रदर्शित हुई है। साल 2014 में सिनेमाघरों में पहुंची 15वीं शताब्ती में उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में रंगीलो बैराठ के कत्यूर वंश के राजा मालूशाही और जौहार के भोट व्यापारी सुनपति शौक की बेटी राजुला की प्रेम कहानी राजुला मालूशाही  पहाड् की सबसे प्रसिद्व अमर प्रेम कहानी है जिसे उत्तराखंडी दर्शकों की अच्छी प्रतिक्रिया नही मिल पाई।यह फ़िल्म ‘दिल्ली अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव’ में ‘ऑडियंस चॉइस’ अवार्ड से भी सम्मानित हो चुकी है। ऐसे में इंतजार है कि उत्तराखंड के स्थानीय सिनेमा में आधुनिकता से मिली हुई नयी रचनात्मकता की जो देश के दूसरे स्थानीय सिनेमा की तरह यहां भी उत्तराखंड की फिल्मों को नये पंख दे सके ।

Nitish Joshi, Bageshwar

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