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हल्द्वानी के वनभूलपुरा रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले में आया अपडेट, सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है मामला

हल्द्वानी के वनभूलपुरा रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले में आया अपडेट, सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है मामला

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by February 7, 2023 News

7 Feb. 2023. New Delhi. हल्द्वानी के बनभूलपुरा रेलवे प्रकरण में अगली सुनवाई दो मई को तय हुई है। रेलवे और राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में आठ सप्ताह का समय मांगा गया है। जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने अगली तारीख निर्धारित कर दी।

सलमान खुर्शीद, प्रशांत भूषण, कॉलिन गोंजाल्वेज़ जैसे दिग्गज वकील बनभूलपुरा की अवाम की ओर से पैरवी कर रहे हैं। बनभूलपुरा के जनप्रतिनिधियों का एक दल इस समय सुप्रीम कोर्ट में मौजूद थे।

बता दें कि 5 जनवरी की अपनी पहली सुनवाई, जिसमें बुलडोजर एक्शन और उत्तराखण्ड हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई थी, में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और रेलवे से अपना पक्ष रखने को कहा था। देखना यह होगा कि आगामी दो मई को राज्य सरकार और रेलवे की ओर से आखिर क्या जवाब दाखिल किया जाएगा।

दरअसल रेलवे भूमि में अतिक्रमण का मामला लंबे समय से उत्तराखंड उच्च न्यायालय में चल रहा था। नौ नवंबर 2016 को हाई कोर्ट ने गौलापार हल्द्वानी के रविशंकर जोशी की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए 10 सप्ताह के भीतर रेलवे की जमीन से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि जितने भी अतिक्रमणकारी हैं, उनको रेलवे पीपीएक्ट के तहत नोटिस देकर जनसुनवाई करें। रेलवे की तरफ से कहा गया कि हल्द्वानी में रेलवे की 29 एकड़ भूमि पर अतिक्रमण किया गया है, जिनमें करीब 4365 अतिक्रमणकारी मौजूद हैं। सुनवाई में किसी भी व्यक्ति के पास जमीन के वैध कागजात नहीं पाए गए।

इस मामले में सुनवाई के दौरान पूर्व में कब्जेदारों की तरफ से कहा गया था कि उनका पक्ष रेलवे ने नहीं सुना था। इस मामले में एक नवम्बर को हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा। जबकि 20 दिसम्बर को कोर्ट ने अपने फैसले में रेलवे की इस 29 एकड़ भूमि को अतिक्रमण मुक्त करने के निर्देश दिए। कहा गया कि भूमि पर काबिज अतिक्रमणकारियों को एक सप्ताह का नोटिस दिया जाए। इस अवधि में अतिक्रमण न हटने पर इसे ध्वस्त कर दिया जाए। इसके बाद रेलवे ने एक जनवरी को भूमि में काबिज लोगों को सार्वजनिक नोटिस जारी कर दिया है।

इस मामले में दो जनवरी को प्रभावित सर्वोच्च न्यायालय की शरण में पहुंचे। मामले में पांच जनवरी को कोर्ट ने राज्य सरकार, रेलवे से पक्ष रखने के लिए सात फरवरी की तिथि नियत की। इधर सात फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान रेलवे ने 8 हफ्ते का समय मांगा। रेलवे का पक्ष सुनते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 2 मई की अगली सुनवाई तय कर दी है।

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