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जोशीमठ की जमीन के नीचे आखिर चल क्या रहा है, वैज्ञानिकों को मिल रही प्रारंभिक जानकारी में मिल रहे हैं संकेत

जोशीमठ की जमीन के नीचे आखिर चल क्या रहा है, वैज्ञानिकों को मिल रही प्रारंभिक जानकारी में मिल रहे हैं संकेत

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by January 8, 2023 News

8 Jan. 2023. Dehradun. उत्तराखंड के चमोली जिले के जोशीमठ में जमीन में आ रही बड़ी बड़ी दरार और इसके कारण 500 से भी ज्यादा घरों में दरार आने से हड़कंप मचा हुआ है, शहर के निचले हिस्से में एक दरार से लगातार झरने की तरह पानी निकल रहा है। राहत और पुनर्वास कार्य जोरों पर है, प्रशासन की ओर से शहर के एक हिस्से को आपदा प्रभावित डेंजर जोन घोषित किया गया है। जमीन में आ रही इन दरारों का कारण जानने के लिए देशभर के विशेषज्ञता प्राप्त वैज्ञानिक संस्थानों को काम पर लगाया गया है, वहीं वैज्ञानिकों के अध्ययन में जो प्राथमिक जानकारी सामने आ रही है वह काफी चिंता पैदा करने वाली है।

जोशीमठ की जमीनी स्थिति पर वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान की ओर से एक प्रारंभिक अध्ययन किया गया है, अध्ययन में पाया गया है कि यहां की जमीन हिमालय के उत्तर से दक्षिण की ओर दोगुनी रफ्तार से खिसक रही है, प्रारंभिक रिपोर्ट में आए इन तथ्यों ने वैज्ञानिकों को और चिंतित कर दिया है। यहां की जमीनी स्थिति का आकलन करने वाली टीम में शामिल डॉक्टर स्वप्नमिता के अनुसार हिमालय की उत्पत्ति के बाद से हिमालय इलाके में जमीन खिसकने की दर 40 मिलीमीटर प्रतिवर्ष रही है जबकि यहां की स्थिति का जो आकलन किया गया है उसके अनुसार यहां 85 मिली मीटर प्रतिवर्ष की दर से जमीन खिसक रही है। यह सर्वे सेटेलाइट के माध्यम से किया गया।

दरअसल जोशीमठ जिस जमीन पर स्थित है वह हिमालय के ग्लेशियर के द्वारा बहा कर लाई गई मिट्टी के ऊपर स्थित है, यह इलाका अंदर से काफी धूसर है और इसमें कई जलधाराएं भूमिगत हैं। ऐसे में यहां जिस दर से जमीन खिसक रही है उससे यह आशंका जताई जा रही है की जमीन के नीचे की जलधाराओं में परिवर्तन आ सकता है या कई जगहों पर जलधाराएं रुक कर जमीन के नीचे पानी का रिजर्वॉयर बना सकती हैं।

वहीं शहर के निचले जेपी कॉलोनी में दरार से झरने की तरह बह रहे पानी का भी अध्ययन किया जा रहा है, प्रारंभिक रूप से माना जा रहा है कि शहर में ड्रेनेज सिस्टम सही नहीं होने के कारण जमीन के नीचे पानी जमा हो रहा हो सकता है या भूमिगत जल धाराओं में किसी प्रकार के परिवर्तन के कारण यह पानी दरार से बाहर निकल सकता है।

हालांकि अब सरकार की ओर से देश के विशेषज्ञता प्राप्त वैज्ञानिक संस्थानों को जोशीमठ का विस्तृत अध्ययन करने के लिए लगाया जा रहा है, एक समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री के निर्देश पर निदेशक राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केन्द (एन.आर.एस.सी) हैदराबाद तथा निदेशक भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान (आईआईआरएस) से जोशीमठ क्षेत्र का विस्तुत सेटलाइट इमेज के साथ अध्ययन कर फोटोग्राफस के साथ विस्तुत रिर्पोट उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। इसके साथ ही उप महानिदेशक भारतीय भू वैज्ञानिक सर्वेक्षण संस्थान से कोटी फार्म, जड़ी बूटी संस्थान, उद्यान विभाग की जोशीमठ स्थित भूमि एवं पीपलकोटी की सेमलडाला स्थित भूमि की पुनर्वास की उपयुक्कता हेतु भू वैज्ञानिक सर्वेक्षण की अपेक्षा की गई है। इसके साथ ही निदेशक आईआईटी रूड़की, निदेशक वाडिया इंस्टियूट आफ हिमालयन ज्योलाजी, निदेशक नेशनल इंस्टीटयूट आफ हाइड्रोलॉजी रूड़की एवं निदेशक सी.एस.आई.आर., सेन्ट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टियूट रूड़की से भी जोशीमठ क्षेत्र का अपने स्तर से विस्तृत सर्वेक्षण एवं अध्ययन कर रिर्पोट प्रस्तुत करने की अपेक्षा की गई है।

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