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मुख्यमंत्री को गिरफ्तार करने निकल पड़ी ये महिला पुलिस अधिकारी, नेता लोग खौफ खाते हैं इससे

मुख्यमंत्री को गिरफ्तार करने निकल पड़ी ये महिला पुलिस अधिकारी, नेता लोग खौफ खाते हैं इससे

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by February 3, 2019 All

आपने कई बहादुर महिलाओं के बारे में सुना होगा पर आज हम आपको किसी सामान्य महिला के बारे में नहीं बल्कि ऐसी महिला के बारे में बताने जा रहे हैं जो कि कर्नाटक की तेज-तर्रार आइपीएस अफसरों में से एक हैं। जी हां हम बात कर रहे हैं आईपीएस डी रूपा की, जो अक्सर ही सम-सामयिक मुद्दों पर ट्वीट और पोस्ट लिखतीं रहतीं हैं और आज के समय में वो कर्नाटक पुलिस में इंस्पेक्टर जनरल यानी आइजी के पोस्ट पर हैं।

बता दें की डी रूपा एक प्रखर शूटर हैं, जिसके चलते उन्होंने राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में ट्रेनिंग के दौरान शूटिंग में कई पुरस्कार जीते हैं। उन्होंने वर्ष 2000 में, संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में 43 वां रैंक हासिल किया। ये ना सिर्फ तेज़-तर्रार हैं बल्कि हिमट्टी भी है और आपको जानकार बेहद ही हैरानी होगी की इन्होने सशस्त्र रिज़र्व के उप पुलिस आयुक्त के रूप में डी रूपा ने कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा के काफिले में इस्तेमाल सरकारी वाहनों को वापस ले लिया।

असल में आपको बता दें कि जब डी रूपा कर्नाटक में डीआइजी जेल के पद पर रहीं तो 2017 में उन्होंने एआईएडीएमके नेता शशिकला को जेल में वीवीआइपी सुविधाएं मिलने का खुलासा किया था। डी रूपा की रिपोर्ट ने खलबली मचा दी थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि जेल के अधिकारियों ने दो करोड़ रुपये लेकर जेल के अंदर शशिकला के लिए किचेन बनवाया गया है। जब जयललिता की करीबी और भ्रष्टाचार में कर्नाटक की जेल में बंद तमिलनाडु की एआईएडीएमके नेता शशिकला को अंदर मिलने वाली वीआइपी सुविधाओं का भंडाफोड़ किया था।

इसके अलावा ये भी बताया जाता है की डी रूपा साल 2004 में एक वारंट को तामील कराने के लिए कर्नाटक से उमा भारती को गिरफ्तार करने एमपी के लिए निकल पड़ीं थी, वो भी उस वक़्त जब उमा भारती मुख्यमंत्री थीं। हालांकि डी रूपा के पहुंचते से पहले तक उमा भारती ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।

दरअसल आपको ये भी बताते चलें की साल 2003 के चुनाव में उमा भारती मुख्यमंत्री बनीं तो उनके खिलाफ दस साल पुराने मामले में गैर जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ था और ये वारंट कर्नाटक के हुबली से जुडा हुआ था। इस दौरान 15 अगस्त 1994 को ईदगाह पर तिरंगा फहराने के मामले में उनके खिलाफ वारंट जारी हुआ था। इतना ही नहीं आरोप तो ये भी था कि उनकी इस पहल से सांप्रदायिक सौहार्द खतरे में पड़ा। वारंट जारी होने पर उमा भारती को कुर्सी छोड़नी पड़ी थी। बाद में कोर्ट में उमा भारती को पेश होना पड़ा। उन्होंने अदालत के आदेशानुसार दंगो में संलिप्त उमा भारती को गिरफ्तार किया था।

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