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उत्तराखंड : गरीब और वंचित बच्चों को शिक्षा उपलब्ध करा रही हैं डॉ. कविता, राज्य को किया जीवन समर्पित

उत्तराखंड : गरीब और वंचित बच्चों को शिक्षा उपलब्ध करा रही हैं डॉ. कविता, राज्य को किया जीवन समर्पित

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by April 8, 2019 News

चैत्र नवरात्रि प्रराम्भ हो गये है। नवरात्रि का अर्थ होता है ‘नौ रातें’। इन नौ रातों और दस दिनों के दौरान, शक्ति / देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है। चैत्र नवरात्रि विशेष के तहत आपको उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सों से ऐसी महिलाओं से रूबरू करवाने की कोशिश है जिन्होंने अपने कार्यों, संघर्षों और जिजीवाषा से समाज के लिए एक मिशाल पेश की है। लीजिए आज आपको रूबरू करवाते हैं मूल रूप से लखनऊ और वर्तमान में मसूरी के सोहम हेरीटेज एवं आर्ट सेंटर, शक्ति की संचालिका व चित्रकार डाॅ कविता शुक्ला से….

ड्राइंग व पेंटिंग में डाक्टरेट डिग्री प्राप्त और काॅलेज जीवन में बेहतरीन स्पोटर्स खिलाड़ी रही, डाॅ कविता शुक्ला और उनके पति समीर शुक्ला 1996 में पहाड़ों की सैर करने निकले थे, इस दौरान उन्हें पहाड़ और यहाँ की सांस्कृतिक विरासत इतनी भायी की वो यहीं के होकर रह गये। इस दंपति नें लखनऊ में अपना मकान बेचकर मसूरी में रहने का फैसला किया। मसूरी से तीन किमी की दूरी में धनोल्टी रोड पर चामुंडा पीठ मंदिर रोड पर बिग बैंड वाला हिसार, मसूरी में अपना मकान बनाया जिसे आज लोग सोहम हेरीटेज एवं आर्ट सेंटर और समाज के गरीब व वंचित बच्चों को व्यक्तिगत स्तर से निःशुल्क शिक्षा प्रदान करने वाले शक्ति केंद्र के रूप में जानते हैं।

डाॅ कविता शुक्ला एक बेहतरीन चित्रकार हैं इसलिए वे संवेदनाओं की धनी है क्योंकि जितनी संवेदनाए एक चित्रकार के भीतर होती है वो दूसरो में नहीं होती है। चित्रकार की बनायी कलाकृतियों में भी वो परिलक्षित होती है। आज से ठीक 20 बरस पहले 1999 में डॉ कविता शुक्ला नें अपने पति के सहयोग से शक्ति केंद्र की नींव रखी और अपनें ही घर को पाठशाला बना दिया। इस पाठशाला द्वारा वे समाज के गरीब व वंचित बच्चों को व्यक्तिगत रूप से निःशुल्क शिक्षा प्रदान कर उनके जीवन में रोशनी बिखेर रही हैं। इस केंद्र में छोटी क्लास से बड़ी क्लास के बच्चों को आखर ज्ञान दिया जाता है। बच्चों को स्कूली पाठ्यक्रम के साथ साथ व्यावहारिक शिक्षा, रोजगारपरक ज्ञान आर्ट, क्राफ्ट और खेलकूद की जानकारी भी दी जाती है जबकि बच्चों के व्यक्तित्व विकास पर भी जोर दिया जाता है। वहीं बच्चों के लिए समसामयिक मुद्दों पर सामान्य ज्ञान और लेखन प्रतियोगिता भी आयोजित की जाती है, ताकि बच्चे हर क्षेत्र मे निपुण हो सके और जीवन की दौड़ में वे हमेशा अब्बल रहें। यहां बड़ी क्लास के बच्चे छोटी क्लास के बच्चों को पढ़ाते हैं और एक-दूसरे की मदद करते हैं। यहां तक कि जो बच्चे पढ़ कर कॉलेज में पहुंच चुके हैं, वो भी समय निकालकर बच्चों को पढ़ाने आते हैं। यहाँ से शिक्षा ग्रहण कर चुके कई बच्चे आज उच्च शिक्षा पाकर खुशहाल जिंदगी जी रहे हैं। इस अनोखे स्कूल मे मसूरी के निकट कैरकुली, भट्टा गांव, बर्लोगंज, बाला हिसार और आस-पास के हर उम्र के बच्चे स्कूल के बाद यहां आते हैं। डॉ कविता शुक्ला का फोकस ड्रापआउट गर्ल्स पर ज्यादा रहता है उन्होंने कई ड्राप आउट बच्चियों को ढूंढ-ढूंढ कर फिर से स्कूल में दाखिला दिलाया। इस अनोखे स्कूल ‘शक्ति’ इंपावरमेंट थ्रू एजूकेशन केंद्र के संचालन का खर्च शुक्ला दंपति, अपने कुछ मित्रों के सहयोग से स्वयं उठाते हैं। डाॅ कविता शुक्ला के घर में बसा है एक हिमालय भी बसा है जहाँ आपको हिमालय से संबंधित छायाचित्रों के अलावा खानपान, कला संस्कृति, तीज त्योहार, वेश-भूषा और लोक संस्कृति के हर वह रंग देखने को मिल जाते हैं, जिन्हें अब लोग भूलते जा रहे हैं। आज देश ही नहीं विदेशों से भी लोग दूर-दूर से हिमालय को जानने-समझने इनके घर पहुंचते हैं। डाॅ कविता शुक्ला एक बेहतरीन चित्रकार हैं उनके द्वारा अब तक सैकडों पेंटिंग बनाई जा चुकी हैं जिनमें उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिलती है। हिमालय की ईष्ट देवी माँ नंदा देवी और नंदा राजजात यात्रा की शानदार पेंटिंग हो चाहे कुमाऊँ की लोकसंस्कृति की बानगी ऐपण, बूढी दीपावली पर बनाई गयी उनकी पेंटिंग उन्हें अलग पहचान दिलाती हैं। वहीं उनके प्रयासों से बनायी गयी पहाड़ी टोपी आज लोगों के मध्य पहली पसंद बनी है।

बकौल डॉ कविता शुक्ला जो खुशी दूसरों की मदद करने से मिलती है वो कहीं नहीं। बेहद खुशी होती है जब किसी वंचित और गरीब लोगो की मदद करती हूँ। पहाड़ और यहां की सांस्कृतिक विरासत बेहद समृद्धशाली है। लेकिन इसके संरक्षण और संवर्धन के लिए अभी तक धरातलीय प्रयास न किया जाना बेहद दुखद है। नीति नियंताओ को चाहिए की हिमालय की सांस्कृतिक विरासत और लोकसंस्कृति को बचाने के लिए एक दीर्घकालीन कार्ययोजना बनाई जानी चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ी को अपनी संस्कृति के बारे मे जान सके..

इस आलेख के जरिए डाॅ कविता शुक्ला जी जिन्होंने शक्ति के जरिए सैकडो गरीब व वंचित बच्चों के जीवन में शिक्षा की रोशनी जलाई जबकि अपने घर को हिमालय की संस्कृति का ठौर बनाया और बेहतरीन पेंटिंग के जरिए पहाड़ की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित कर नयी पहचान दिलाई है, उनको आप सभी के सामने लाने की कोशिश है ।

अगर आप कभी भी मसूरी जायें तो एक बार जरूर शुक्ला दंपति के मसूरी के सोहम हेरीटेज एवं आर्ट सेंटर और शक्ति केंद्र का दीदार करना न भूले…. जहाँ एक बार जाने पर आप हर बार यहाँ आना चाहेंगे

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Sanjay Chauhan, Journalist, Chamoli

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