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चेन्नई में होगी मोदी और जिनपिंग की मुलाकात, भारत बोला कश्मीर मुद्दे पर बाहरी दखल नहीं चलेगा

चेन्नई में होगी मोदी और जिनपिंग की मुलाकात, भारत बोला कश्मीर मुद्दे पर बाहरी दखल नहीं चलेगा

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by October 9, 2019 News

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 11 अक्तूबर को दो दिवसीय दौरे पर भारत पहुंचेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ चेन्नई में दोनों नेताओं की मुलाकात होगी। दोनों वैश्विक नेता चार अलग-अलग बैठकें करेंगे। इस दौरान पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग समुद्र किनारे बने रिसॉर्ट में रहेंगे जहां से बंगाल की खाड़ी का नजारा दिखता है। 

दोनों नेता महामल्लापुरम के तीन प्रसिद्ध स्मारकों और एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। विदेश मंत्रालय के मुताबिक चेन्नई में होने वाली इस अनौपचारिक शिखर वार्ता में प्रधानमंत्री मोदी औऱ राष्ट्रपति जिनपिंग कई अहम द्विपक्षीय , क्षेत्रीय औऱ वैश्विक मुद्दों पर चर्चा को आगे बढ़ाएंगे। ये शिखर बैठक भारत और चीन के नेताओं को विभिन्न मुद्दों पर बातचीत जारी रखने का अवसर उपलब्ध कराएगी । 

भारत में चीन के राजदूत सुन विडोंग ने कहा है कि सीमा विवाद का अंतिम समाधान होने तक दोनों देशों को संयुक्त रूप से अपनी-अपनी सीमाओं पर शांति और स्थायित्व बनाए रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि दो पडोसियों के बीच मतभेद होना सामान्य बात है और इन्हें आपसी बातचीत से सुलझाया जाना चाहिए। चीनी राजनयिक ने कहा कि उभरती हुई दो एशियाई शक्तियों को अपने सामान्य आपसी रिश्तों पर सीमा विवाद का प्रतिकूल प्रभाव नहीं पडने देना चाहिए।

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा से पहले भारत में चीन के राजदूत सुन विडोंग ने उम्मीद जताई कि उनकी कंपनियों को यहां निष्पक्ष, मित्रवत और सुविधाजनक कारोबारी माहौल मिलेगा। उन्होंने कहा कि एशिया की दोनों ताकतों को व्यापार और निवेश बढ़ाने के लिए आपसी सहयोग को और मजबूत करना चाहिए।

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा और प्रधानमंत्री मोदी के साथ अनौपचारिक बैठक पर भारत में चीन के राजदूत सुन विडोंग ने कहा कि भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय संबंध सकारात्मक है और राष्ट्रपति की यात्रा से इसके और मजबूत होने की उम्मीद है। 

इस सबके बीच विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने साफ-साफ शब्दों में कहा कि जम्मू और कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और चीन इससे अच्छी तरह से वाकिफ है। उन्होंने कहा कि दुनिया के अन्य देशों को भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने की कोई जरूरत नहीं है।

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