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भारत-चीन सीमा LAC पर कैसी है तनाव की स्थिति, पढ़िये रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने बताया

भारत-चीन सीमा LAC पर कैसी है तनाव की स्थिति, पढ़िये रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने बताया

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by September 15, 2020 News

भारत-चीन तनाव और एलएसी ( LAC ) पर वर्तमान स्थिति को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में एक बयान दिया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि जैसा कि हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल ही में लद्दाख का दौरा कर हमारे बहादुर जवानों से मुलाकात की थी एवं उन्हें यह संदेश भी दिया था कि समस्त देशवासी अपने वीर जवानों के साथ खड़े हैं। मैंने भी लद्दाख जाकर अपने शूरवीरों के साथ कुछ समय बिताया है और मैं आपको यह बताना चाहता हॅूं कि मैंने उनके अदम्य साहस, शौर्य और पराक्रम को महसूस किया है। रक्षामंत्री ने आगे कहा कि अप्रैल माह से Eastern Ladakh की सीमा पर चीन की सेनाओं की संख्या तथा उनके armaments में वृद्धि देखी गई, मई महीने की के प्रारंभ में चीन ने गलवान घाटी क्षेत्र में हमारी troops के normal, traditional patrolling pattern में व्यवधान  शुरू किया जिसके कारण face-off की स्तिथि उत्पन्न हुई, हमने चीन को diplomatic तथा military channels के माध्यम से यह अवगत करा दिया, कि इस प्रकार की गतिविधियाँ, status quo को unilaterally बदलने का प्रयास है।  यह भी साफ कर दिया गया कि ये प्रयास हमें किसी भी सूरत में मंजूर नहीं है। LAC पर friction बढ़ता हुआ देख कर दोनों तरफ के सैन्य कमांडरों ने 6 जून 2020 को मीटिंग की। इस बात पर सहमति बनी कि reciprocal actions के द्वारा disengagement किया जाए।दोनो पक्ष इस बात पर भी सहमत हुए कि LAC को माना जाएगा तथा कोई ऐसी कार्रवाई नहीं की जाएगी, जिससे status-quo बदले। इस सहमति के violation में चीन द्वारा एक violent face off की स्थिति 15 जून को गलवान में create की गई।  हमारे बहादुर सिपाहियों ने अपनी जान का बलिदान दिया पर साथ ही चीनी पक्ष को भी भारी क्षति पहुचाई और अपनी सीमा की सुरक्षा में कामयाब रहे। इस पूरी अवधि के दौरान हमारे बहादुर जवानों ने, जहाँ संयम की जरूरत थी वहां संयम रखा तथा जहाँ शौर्य की जरुरत थी, वहां शौर्य प्रदर्शित किया।

रक्षामंत्री ने आगे बताया एक ओर किसी को भी हमारे सीमा की सुरक्षा के प्रति हमारे determination के बारे में संदेह नहीं होना चाहिए, वहीं भारत यह भी मानता है कि पड़ोसियों के साथ शांतिपूर्ण संबंधों के लिए आपसी सम्मान और आपसी sensitivity आवश्यक हैं, चूंकि हम मौजूदा स्थिति का dialogue के जरिए समाधान चाहते हैं,   हमने Chinese side के साथ diplomatic और military engagement बनाए रखा है।  इन discussions में तीन key principles हमारी approach को तय करते हैं…

i) दोनों पक्षों को LAC का सम्मान और कड़ाई से पालन करना चाहिए

(ii) किसी भी पक्ष को अपनी तरफ से यथास्थिति का उल्लंघन करने का प्रयास नहीं करना चाहिए

और  (iii) दोनों पक्षों के बीच सभी समझौतों और understandings का पूर्णतया पालन होना चाहिए।

रक्षामंत्री ने बताया कि जब ये discussions चल ही रहे थे, चीन की तरफ से 29 और 30 अगस्त की रात को provocative सैनिक कार्रवाई की गई, जो Pangong Lake के South Bank area में status quo को बदलने का प्रयास था।लेकिन एक बार फिर हमारी सेना द्वारा timely और firm actions के कारण उनके ये प्रयास सफल नहीं हुए, इन सभी घटनाक्रम से स्पष्ट है, चीन की कार्रवाई से हमारे विभिन्न द्विपक्षीय समझौतों के प्रति उसका disregard दिखता है। चीन द्वारा troops की भारी मात्रा में तैनाती किया जाना 1993 और 1996 के समझौतों का उल्लंघन है। LAC का सम्मान करना और उसका कड़ाई से पालन किया जाना, सीमा क्षेत्रों में शांति और सद्भाव का आधार है, और इसे 1993 एवं 1996 के समझौतों में स्पष्ट रूप से स्वीकार किया गया है।  जबकि हमारी armed forces इसका पूरी तरह पालन करती हैं, Chinese side की ओर से ऐसा नहीं हुआ है। अभी की स्थिति के अनुसार, Chinese side ने LAC  और अंदरूनी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में सैनिक टुकड़ियां और गोलाबारूद mobilize किया हुआ है।  पूर्वी लद्दाख और Gogra, Kongka La और Pangong Lake के North और South Banks पर कई friction areas हैं। चीन की कार्रवाई के जवाब में हमारी armed forces ने भी इन क्षेत्रों में उपयुक्त counter deployments किए हैं ताकि भारत के security interests पूरी तरह सुरक्षित रहे। रक्षा मंत्री ने बताया कि उन्होंने मॉस्को में अपने चीनी समकक्ष के साथ मुलाकात में चीन को साफ कर दिया है कि भारत तनाव के इस मुद्दे को शांतिपूर्ण ढंग से हल करना चाहता है और हम चाहते हैं कि चीनी पक्ष हमारे साथ मिलकर काम करें, वहीं हमने यह भी स्ष्ट कर दिया कि हम भारत की sovereignty और territorial integrity की रक्षा के लिए पूरी तरह से determined हैं। रक्षामंत्री ने कहा कि हमारी armed forces इस चुनौती का सफलता से सामना करेंगी।

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