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जर्मनी में जी-7 बैठक में जलवायु, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और लैंगिक समानता पर बोले पीएम मोदी, पढ़िए क्या कहा

जर्मनी में जी-7 बैठक में जलवायु, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और लैंगिक समानता पर बोले पीएम मोदी, पढ़िए क्या कहा

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by June 28, 2022 News

28 June. 2021. जर्मनी में जी – 7 देशों के शिखर सम्मेलन में भारत को आमंत्रित किया गया था, सम्मेलन में जलवायु, ऊर्जा और स्वास्थ्य विषय पर बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि दुर्भाग्यवश, ऐसा माना जाता है कि विश्व के विकास और पर्यावरण सुरक्षा के लक्ष्यों के बीच एक मूल टकराव है। एक और गलत धारणा यह भी है कि गरीब देश और गरीब लोग पर्यावरण को अधिक नुक्सान पहुंचाते हैं। किन्तु भारत का हज़ारों वर्षों का इतिहास इस सोच का पूर्ण रूप से खंडन करता है। प्राचीन भारत ने अपार समृधि का समय देखा; फिर हमने आपदा से भरी गुलामी की सदियाँ भी सहीं; और आज स्वतन्त्र भारत पूरे विश्व में सबसे तेज़ी से ग्रो कर रही बड़ी economy है। किन्तु इस पूरे कालखंड में भारत ने पर्यावरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को रत्ती भर भी dilute नहीं होने दिया। भारत में विश्व की 17% आबादी रहती है। किन्तु वैश्विक कार्बन इमिशन में हमारा योगदान सिर्फ 5% है। इसका मूल कारण हमारी lifestyle है, जो नेचर के साथ सह-सस्तित्व के सिद्धांत पर आधारित है। यह तो आप सभी मानेंगे कि energy एक्सेस सिर्फ अमीरों का प्रिविलेज नहीं होना चाहिए – एक गरीब परिवार का भी energy पर बराबर का हक़ है।आज जब geopolitical टेंशन के कारण उर्जा के दाम आसमान छू रहे हैं इस बात को याद रखना और महत्वपूर्ण हो गया है। इसी सिद्धांत से प्रेरणा ले कर हमने भारत में घर-घर LED bulbs और clean कुकिंग गैस पहुँचाया, और यह दिखाया कि गरीबों के लिए ऊर्जा सुनिश्चित करते हुए भी कई मिलियन टन कार्बन एमिशन बचाया जा सकता है।

पीएम मोदी ने कहा कि अपने climate commitments के प्रति हमारी प्रतिबद्धता हमारे performance से स्पष्ट है। Non-Fossil sources से 40 प्रतिशत उर्जा-capacity का लक्ष्य हमने समय से 9 वर्ष पहले ही प्राप्त कर लिया। पेट्रोल में 10 प्रतिशत एथनॉल-ब्लेंडिंग का लक्ष्य समय से 5 माह पूर्व प्राप्त कर लिया। पेट्रोल में 10 प्रतिशत एथनॉल-ब्लेंडिंग का लक्ष्य समय से 5 माह पूर्व प्राप्त कर लिया गया। भारत में विश्व का पहला पूरी तरह सोलर पावर संचालित एयरपोर्ट है। भारत का विशाल रेलवे system इसी दशक में नेट zero हो जाएगा।,

पीएम मोदी ने कहा कि भारत जैसा विशाल देश जब ऐसी महत्वाकांक्षा दिखाता है तो अन्य विकासशील देशों को भी प्रेरणा मिलती है। हमें आशा है कि G-7 के समृद्ध देश भारत के प्रयत्नों को समर्थन देंगे। आज भारत में क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजीज के लिए एक बहुत बड़ा market बन रहा रहा है। G-7 देश इस क्षेत्र में research, innovation, और manufacturing में निवेश कर सकते हैं। हर नयी technology के लिए भारत जो स्केल दे सकता है उससे वह technology पूरे विश्व के लिए किफायती बन सकती है। सर्कुलर ईकोनॉमी के मूल सिद्धांत भारतीय संस्कृति और जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। मैंने पिछले वर्ष ग्लासगो में LIFE – Lifestyle for Environment – नाम के मूवमेंट का आह्वान किया था। इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस पर हमने LiFE अभियान के लिए ग्लोबल इनिशियेटिव लाँच किया। इस अभियान का उद्देश्य पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली को बढ़ावा देना है। इस movement के अनुयायियों को हम ट्रिपल-P यानि ‘pro planet people’ बोल सकते हैं, और हम सभी को अपने अपने देशों में ट्रिपल-P लोगों कि संख्या बढ़ाने का जिम्मा लेना चाहिए।आने वाली पीढ़ियों के लिए यह हमारा सबसे बड़ा योगदान होगा।,

पीएम मोदी ने कहा कि मानव और प्लानेट का स्वास्थ्य आपस में जुड़ा है। इसलिए, हमने one world, one health का approach अपनाया है। महामारी के दौरान भारत ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में digital technology के उपयोग के लिए कई रचनात्मक तरीके निकाले। इन innovations को अन्य विकासशील देशों तक ले जाने के लिए G7-देश भारत को सहयोग दे सकते हैं। अभी हाल ही हम सभी ने इंटरनेशनल डे of योग मनाया। COVID के संकट के समय में योग विश्व के सभी लोगों के लिए preventive हेल्थ का उत्तम साधन बना – इस से कई लोगों को अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को मेन्टेन करने में मदद मिली। योग के आलावा भी भारत समेत विश्व के कई देशों में ट्रेडिशनल मेडिसिन की बहुमूल्य धरोहर है, जिसे होलिस्टिक हेल्थ के लिए उपयोग किया जा सकता है। मुझे ख़ुशी है कि हाल ही में WHO ने अपने Global Centre फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन को भारत में स्थापित करने का निर्णय लिया। यह सेंटर न सिर्फ विश्व के अलग अलग ट्रेडिशनल मेडिसिन पद्धतियों का repository बनेगा, बल्कि इनमे और research को भी प्रोत्साहन देगा। इसका लाभ विश्व के सभी नागरिकों को मिलेगा।

जी-7 शिखर सम्मेलन में ‘एक साथ मजबूत: खाद्य सुरक्षा को संबोधित करना और लैंगिक समानता को आगे बढ़ाना’ विषय पर सत्र में प्रधानमंत्री की टिप्पणी

हम वैश्विक तनाव के माहौल में मिल रहे हैं। भारत सदैव शांति का पक्षधर रहा है। वर्तमान स्थिति में भी हमने लगातार डायलॉग तथा diplomacy का रास्ता अपनाने का आग्रह किया है। इस geo-political तनाव का impact सिर्फ यूरोप तक सीमित नहीं है। ऊर्जा और खाद्यान्न की बढ़ती कीमतों का दुष्प्रभाव सभी देशों पर पड़ रहा है। विकासशील देशों की उर्जा और खाध्य सुरक्षा विशेष रूप से खतरे में है। इस चुनौतीपूर्ण समय में भारत ने कई जरूरतमंद देशों को खाद्यान्न की आपूर्ति की है। हमने अफ़ग़ानिस्तान को पिछले कुछ महीनों में लगभग 35 हज़ार टन गेंहू मानवीय सहायता के रूप में दिया है। और अभी वहां भारी भूकंप आने के बाद भी भारत राहत सामग्री पहुंचाने वाला सबसे पहला देश था। हम अपने पड़ोसी श्रीलंका की फ़ूड security सुनिश्चित करने के लिए भी सहायता कर रहे हैं।

वैश्विक खाद्य सुरक्षा के विषय पर मेरे कुछ सुझाव हैं। पहला, हमें फर्टिलाईजर की उपलब्धी पर focus करना चाहिए, और वैश्विक स्तर पर fertilizers की value chains को सुचारू रखना चाहिए। हम भारत में फ़र्टिलाइज़र के उत्पादन को बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं और इसमें G7-देशों से सहयोग चाहेंगे। दूसरा, G7 के देशों कि तुलना में भारत के पास अपार कृषि manpower है। भारतीय कृषि कौशल ने G7 के कुछ देशों में Cheese और ओलिव जैसे पारंपरिक कृषि products को नया जीवन देने में मदद की है। क्या G7 अपने सदस्य देशों में भारतीय कृषि talent के व्यापक उपयोग के लिए कोई structured व्यवस्था बना सकता है? भारत के किसानों के पारंपरिक टैलेंट की मदद से G7 देशों को फ़ूड सिक्यूरिटी सुनिश्चित होगी।

अगले वर्ष विश्व International Year of Millets मना रहा है। इस अवसर पर हमें millets जैसे पौष्टिक विकल्प को प्रचलित करने के लिए कैंपेन चलाना चाहिए। मिल्लेट्स विश्व में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में बहुमूल्य योगदान दे सकते हैं। अंत में, मैं आप सभी का ध्यान भारत में हो रहे ‘natural farming’ revolution की तरफ आकर्षित करना चाहूंगा। आपके एक्सपर्ट्स इस प्रयोग का अध्ययन कर सकते हैं। इस विषय पर हमने एक नॉन-पेपर आप सभी से शेयर किया है।

जहाँ gender equality की बात है, आज भारत का approach ‘women’s development’ से बढ़ कर ‘women-led development’ पर जा रहा है। महामारी के दौरान 6 मिलियन से अधिक भारतीय महिला फ्रंटलाइन वर्कर्स ने हमारे नागरिकों को सुरक्षित रखा। हमारी महिला वैज्ञानिकों ने भारत में वैक्सीन और टेस्ट किट्स विकसित करने में बड़ा योगदान दिया। भारत में एक मिलियन से भी अधिक फीमेल वालंटियर्स रूरल हेल्थ प्रदान करने में सक्रिय हैं, जिन्हें हम ‘आशा workers’ बोलते हैं। अभी पिछले महीने ही World Health Organisation ने इन भारतीय आशा workers को अपना ‘2022 Global लीडर्स अवार्ड’ दे कर सम्मानित किया।

भारत में लोकल गवर्नमेंट से नेशनल गवर्नमेंट तक अगर सभी elected लीडर्स की गणना की जाए, तो इसमें से आधे से अधिक महिलायें हैं, और इनकी टोटल संख्या मिलियंस में होगी। यह दिखाता है कि असल decision-मेकिंग में भारतीय महिलाएं आज पूरी तरह से involved हैं।अगले वर्ष भारत G20 की अध्यक्षता करने जा रहा है। हम G20 प्लेटफार्म के तहत post-COVID रिकवरी सहित अन्य मुद्दों पर G7-देशों के साथ करीबी संवाद बनाये रखेंगे।

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