भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को पीएम मोदी ने दिखाई हरी झंडी, कहा 21वीं सदी हाइड्रोजन ट्रेनों की होगी
17 July 2026. New Delhi. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है, जो स्वच्छ रेल परिवहन के लिए हाइड्रोजन तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। जींद से सोनीपत के बीच करीब 90 किलोमीटर लंबे रेलखंड पर इस ट्रेन का संचालन पायलट परियोजना के तौर पर शुरू किया गया है।
उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 19वीं शताब्दी की रेलगाड़ियां मुख्य रूप से भाप इंजनों से चलती थीं, 20वीं शताब्दी में रेल बिजली से चलने लगीं और अब 21वीं सदी हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेनों की होगी। उन्होंने कहा कि जींद-सोनीपत रूट से इस नए युग की आधिकारिक शुरुआत हुई है और भारतीय रेलवे ने भविष्य की तकनीक में बड़ी छलांग लगाई है।
दुनिया की सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनों में शामिल
प्रधानमंत्री ने कहा कि हाइड्रोजन ट्रेन तकनीक दुनिया में महज 7-8 साल पहले ही व्यावहारिक रूप से अस्तित्व में आई है और अभी केवल कुछ ही देशों के पास इस तकनीक पर ट्रेनें चलाने की क्षमता है। उन्होंने बताया कि भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन 3,200 हॉर्सपावर की क्षमता वाली है और इसमें 10 कोच लगाए गए हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिकांश हाइड्रोजन ट्रेनों में केवल 3 से 4 कोच होते हैं, जबकि भारत ने पहले ही प्रयास में 10 कोच वाली ट्रेन सफलतापूर्वक तैयार कर अपनी तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन किया है।
‘मेक इन इंडिया’ की बड़ी सफलता
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह पूरी तरह धुआं रहित और पर्यावरण अनुकूल ट्रेन ‘मेक इन इंडिया’ अभियान की बड़ी सफलता है। उन्होंने इस ट्रेन के डिजाइन और निर्माण में योगदान देने वाले भारतीय इंजीनियरों और घरेलू विनिर्माण कंपनियों की सराहना करते हुए कहा कि यह देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता का शानदार उदाहरण है।
जींद बना हाइड्रोजन हब
जींद और सोनीपत के बीच चलने वाली यह ट्रेन भारतीय रेलवे की एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। ट्रेन के संचालन के लिए जींद में स्वदेशी हाइड्रोजन स्टोरेज और रीफ्यूलिंग सुविधा विकसित की गई है। पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन (PESO) ने कंप्रेस्ड हाइड्रोजन गैस के स्टोरेज और डिस्पेंसिंग के लिए आवश्यक लाइसेंस भी जारी कर दिया है। रीफ्यूलिंग के लिए आधुनिक हाइड्रोजन कंप्रेशन सिस्टम लगाया गया है, जबकि सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्टैंडबाय कंप्रेसर यूनिट और जरूरी स्पेयर पार्ट्स की भी व्यवस्था की गई है।
हाइड्रोजन ट्रेन की प्रमुख खूबियां
- हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक से बिजली उत्पन्न करती है।
- संचालन के दौरान केवल जलवाष्प (पानी की भाप) निकलती है, जिससे शून्य कार्बन उत्सर्जन होता है।
- जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने और नेट-जीरो लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी।
- कम शोर, बेहतर ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण संरक्षण इसकी प्रमुख विशेषताएं हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हाइड्रोजन ट्रेनों के लिए अलग तरह के बुनियादी ढांचे और विशेष सुविधाओं की आवश्यकता होती है। आने वाले समय में इस तकनीक से जुड़े नए कारखाने और सपोर्ट सिस्टम विकसित होंगे, जिससे हरियाणा सहित देशभर में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
99 फीसदी रेल नेटवर्क का हो चुका विद्युतीकरण
प्रधानमंत्री ने कहा कि 2014 से पहले यदि वैश्विक ईंधन संकट आता तो डीजल पर निर्भर भारतीय रेल व्यवस्था गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती थी। उन्होंने बताया कि 1925 से 2014 तक जहां केवल 30 प्रतिशत रेल मार्गों का विद्युतीकरण हुआ था, वहीं पिछले वर्षों में देश का लगभग 99 प्रतिशत रेल नेटवर्क और हरियाणा का 100 प्रतिशत रेल ट्रैक विद्युतीकृत किया जा चुका है। इसी कारण वैश्विक तेल आपूर्ति में बाधाओं के बावजूद भारतीय रेल का संचालन प्रभावित नहीं हुआ।
भारत वैश्विक क्लब में शामिल
भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन के साथ देश जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका जैसे उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जहां हाइड्रोजन आधारित रेल प्रणाली का परीक्षण या संचालन किया जा रहा है। भारतीय रेलवे का मानना है कि यह पहल भविष्य में स्वच्छ, टिकाऊ और आत्मनिर्भर रेल परिवहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।
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