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Uttarakhand श्राद्ध और पहाड़, सराद का भात, एक रोचक लेख श्राद्ध की परंपरा पर

बातों बातों में :- पिताजी का श्राद्ध और सराद का भात (लेखक द्वारा ये आर्टिकल अपने स्वर्गीय पिताजी की याद में लिखा गया है ) : फिल्म ‘झुक गया आसमान’ का गीत सुना ही होगा-“जिस्म को मौत आती है लेकिन, रूह को मौत आती नहीं है”। रूह (आत्मा) अजर-अमर कही जाती है। माना जाता है कि आत्मा कभी नष्ट नहीं होती। श्रीमद् भागवत के अनुसार जन्म लेने वाले की मृत्यु…

उत्तराखंड में सिर्फ यहां दूध और मक्खन से होती है होली, सावन महीने के अंत में मनाया जाता है ये पर्व

उत्तरकाशी जनपद के दयारा बुग्याल में सावन खत्म होने और भाद्रपद प्रारंभ होने पर स्थानीय लोगों द्वारा बुग्यालो में मक्खन से होली खेली जाती है। बकरी पालक और मवेशियों को पालने वाले लोगों के द्वारा यहां हर वर्ष यह त्यौहार मनाया जाता है। यह त्यौहार संस्कृति के साथ ही संभ्रांतता को भी दर्शाता है, अक्सर सावन माह के बाद मवेशी पालक अपनी छानियों से अपने घरों की ओर आने की…

इस सप्ताह का आपका राशिफल बता रही हैं नंदिता, टैरो कार्ड से सटीक जानकारी

अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित उत्तराखंड के समाचारों का एकमात्र गूगल एप फोलो करने के लिए क्लिक करें…. Mirror Uttarakhand News साप्ताहिक टैरो भविष्य फल  ( ३ अप्रैल  – ९ अप्रैल  २०२१ ) नन्दिता पाण्डेय ऐस्ट्रोटैरोलोजर , आध्यात्मिक गुरु, लाइफ़ कोच मेष ( २२ मार्च – २१ अप्रैल )  कार्य क्षेत्र में उन्नति होगी एवं अपने कलिग के साथ आपसी अंडर्स्टैंडिंग की वजह से समय पर प्रोजेक्ट पूर्ण होते जाएँगे। आर्थिक मामलों में समय अनुकूल तो रहेगा लेकिन साधारण सफलता…

इस सप्ताह का आपका राशिफल बता रही हैं नंदिता, टैरो कार्ड के जरिये सटीक जानकारी

अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित उत्तराखंड के समाचारों का एकमात्र गूगल एप फोलो करने के लिए क्लिक करें…. Mirror Uttarakhand News साप्ताहिक टैरो भविष्य फल  (  १३  फ़रवरी  – १९ फ़रवरी  २०२१ )  नन्दिता पाण्डेय  ऐस्ट्रोटैरोलोजर , आध्यात्मिक गुरु, लाइफ़ कोच    मेष ( २२ मार्च – २१ अप्रैल )     परिवार के सानिध्य में सुखद समय व्यतीत करेंगे एवं आपसी प्रेम बड़ेगा। इस सप्ताह की गयी यात्राओं द्वारा भी विशेष सफलता प्राप्त होगी। आर्थिक धन…

उत्तराखंड का एक ऐसा मंदिर जहां चिट्ठी लिखकर होती है मुराद पूरी, भक्तों की है प्रगाढ़ आस्था

उत्तराखंड राज्य देवभूमि के नाम से जाना जाता है। ऐसी भूमि जहां देवी-देवता निवास करते हैं। यहां हम बात कर रहे हैं उत्तराखंड राज्य के नैनीताल जिले स्थित भवाली से लगभग पांच किलोमीटर की दूरी पर बसे सुरम्य, रमणीक, शांत और धार्मिक स्थल ‘घोड़ाखाल’ की। इस मंदिर को ‘घंटियों के मंदिर’ के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर में प्रवेश करते ही आपको अनगिनत घंटियांं देखने को मिलेंगी। मान्यतानुसार…

ईगास 2020 : बूढ़ी दीपावली (बग्वाल) और भैलो का खेल, पढ़िए उत्तराखंड की इस अद्वितीय संस्कृति के बारे में

उत्तराखंड, एक ऐसा प्रदेश जहां की संस्कृति कई रंगों से भरी हुई है। जहां की बोली में एक मिठास है। जहां हर त्योहार को अनूठे अंदाज में मनाया जाता है। इगास-बग्वाल यानी दीपावली भी एक ऐसा ही त्योहार है जो उत्तराखंड की परंपराओं को जीवंत कर देता है। पहाड़ में बग्वाल (दीपावली) के ठीक 11 दिन बाद ईगास मनाने की परंपरा है। दरअसल ज्योति पर्व दीपावली का उत्सव इसी दिन…

मिरर उत्तराखंड की तरफ से आप सभी को दीपावली की ढेरों शुभकामनाएं

आप सभी को मिरर उत्तराखंड की ओर से दीपावली की ढेर सारी शुभकामनाएं। हैप्पी दीपावली टू ऑल ऑफ यू फ्रॉम मिरर उत्तराखंड। Happy Deepawali. अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित उत्तराखंड के समाचारों का एकमात्र गूगल एप फोलो करने के लिए क्लिक करें…. Mirror Uttarakhand News ( उत्तराखंड की नंबर वन न्यूज, व्यूज, राजनीति और समसामयिक विषयों की वेबसाइट मिरर उत्तराखंड डॉट कॉम से जुड़ने और इसके लगातार अपडेट पाने के लिए नीचे लाइक बटन…

Uttarakhand असोज का महीना, पुवे, लुट्टे, पल्ट और पहाड़ की जीवट किसानी, भुवन बिष्ट का शानदार आलेख पढ़िए

भारत और हमारी देवभूमि उत्तराखंड कृषि प्रधान रहे हैं, देवभूमि उत्तराखंड की धड़कन हैं गांव। देवभूमि के पहाड़ के गांवों में कृषि,पशुपालन,फलोत्पादन,सब्जी उत्पादन, खेती बाड़ी प्रमुख रूप से जीविकोपार्जन का एक सशक्त माध्यम रहे हैं। आज भले ही पलायन से गांव खाली हो चुके हों या जंगली जानवरों, बंदरों, आवारा पशुओं के आतंक से खेती बाड़ी चौपट हो रही हो या किसानों का मोह भंग हो रहा हो किन्तु फिर…

Uttarakhand कुमाऊं में विरुड़-पंचमी से शुरू हुआ शिव-पार्वती पर श्रद्धा का पर्व, सातों-आठों के साथ होगा खत्म

उत्तराखंड शिव और पार्वती की भूमि है, हिमालय पुत्री पार्वती को यहां बेटी माना जाता है। एक ओर जहां आजकल नंदा रूपी पार्वती को शिव के घर कैलाश छोड़ने का उत्सव नंदा लोकजात या नंदा महोत्सव के रूप में मनाया जा रहा है तो वहींं कुमाऊंं के कुछ हिस्से में आजकल सातों आठों पर्व की तैयारी शुरू हो गई है। इस पर्व की शुरुआत विरुड़ पंचमी से होता है ।…

Uttarakhand हरेला पर्व मनाया, प्रकृति के सम्मान और संरक्षण को समर्पित है ये त्यौहार, जानिए इसके बारे में

आज गुरुवार को उत्तराखंड में हरेला पर्व मनाया गया, यह पर्व इंसान को प्रकृति का सम्मान और संरक्षण करना सिखाता है। मूल रूप से कुमाऊं में मनाए जाने वाले इस पर्व को कृषि से भी जोड़ा जाता है, पहाड़ों में खेती काफी विकट होती है और इस पर्व में भी उत्तराखंड के किसान की विकटता दिखती है। आइए आपको बताते हैं हरेला पर्व के बारे में…. यह पर्व वर्ष में…

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