Skip to Content

डेयरी क्षेत्र को ‘आत्मनिर्भर’ बनाने के लिए 5,000 करोड़ की  डेयरी सहकार योजना शुरू, अमित शाह ने किया शुभारंभ

डेयरी क्षेत्र को ‘आत्मनिर्भर’ बनाने के लिए 5,000 करोड़ की डेयरी सहकार योजना शुरू, अमित शाह ने किया शुभारंभ

Closed
by November 1, 2021 News

1 Nov 2021 : नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सहकारिता से समृद्धि’ के दृष्टिकोण को साकार करने के उद्देश्य से, केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह तथा केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने संयुक्त रूप से देश में सहकारी डेयरी व्यवसायों को प्रोत्साहित करने पर ध्यान देते हुए 5,000 करोड़ रुपये के निवेश की परिकल्पना वाली योजना ‘डेयरी सहकार’ प्रारंभ की है।

यह पहली बार है, कि भारत सरकार के पशुपालन और डेयरी विभाग की साझेदारी में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) द्वारा डेयरी व्यवसाय के सभी पहलुओं से संबंधित सहकारी समितियों के लिए विशेष रूप से एक व्यापक योजना तैयार की गई है।

योजना प्रारंभ करने से पहले, गुजरात के आणंद में दूध डेयरी सहकारी कंपनी अमूल के 75 वें स्थापना वर्ष का उत्सव मनाने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में शाह ने कहा कि डेयरी क्षेत्र और सहकारी समितियों की भारत को न केवल 5 ट्रिलियन अमरीकी डालर की अर्थव्यवस्था में बदलने में बल्कि कृषि और संबद्ध क्षेत्रों को आत्मनिर्भर बनाने में  भी प्रमुख भूमिका है। 

शाह ने कहा, “हमें कृषि और पशुपालन जैसे क्षेत्रों को सशक्त बनाने के लिए इस सहकारी मॉडल को लागू करने की आवश्यकता है तथा एनसीडीसी द्वारा 5000 करोड़ रुपये का डेयरी सहकार उसी दिशा में एक कदम है।” उन्होंने कहा कि अमूल की स्थापना 1946 में आणंद में एक सहकारी आंदोलन के रूप में सरदार वल्लभ भाई पटेल और सहकारिता नेता त्रिभुवनदास पटेल के मार्गदर्शन में प्रारंभ हुई थी। शाह ने कहा कि अमूल दुनिया के लिए एक मॉडल है।

डेयरी सहकार के अंतर्गत, एनसीडीसी ने 5,000 करोड़ रुपये निर्धारित किए हैं, पशुपालन एवं डेयरी जैसे केंद्र सरकार के अन्य मंत्रालयों के अभिसरण से इसे और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा । यह योजना सहकारिताओं द्वारा विभिन्न प्रकार के व्यवसायों के लिए महत्वपूर्ण क्रेडिट लिंकेज प्रदान करेगी,” एनसीडीसी के प्रबंध निदेशक संदीप कुमार नायक ने बताया कि लाभार्थियों को लाभान्वित करने हेतु विभिन्न केंद्रीय योजनाओं को राज्य सरकारों, संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन विकास एजेंसियों एवं अन्य के साथ समायोजित  किया जाएगा । ऋण की अवधि 5-10 वर्षों के लिए होगी, जिसमें परियोजना के प्रकार और राजस्व धाराओं के आधार पर मूलधन के पुनर्भुगतान पर 1-2 वर्ष की स्थगन अवधि शामिल है । नायक ने यह भी कहा कि यह योजना शुरू में वर्ष 2021-22 से वर्ष 2025-26 तक पांच वर्षो की अवधि के लिए लागू की जाएगी । 

( उत्तराखंड की नंबर वन न्यूज, व्यूज, राजनीति और समसामयिक विषयों की वेबसाइट मिरर उत्तराखंड डॉट कॉम से जुड़ने और इसके लगातार अपडेट पाने के लिए फेसबुक पर Uttarakhand Mirror से जुड़ें, अगर आप वेबसाइट पर हैं तो नीचे लाइक बटन क्लिक करें )

अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित उत्तराखंड के समाचारों का एकमात्र गूगल एप फोलो करने के लिए क्लिक करें…. Mirror Uttarakhand News या गूगल पर सर्च करें Mirror Uttarakhand News)

Previous
Next
Loading...