डच ‘वॉटर वंडर’ से भारत के कल्पसर तक, मोदी-जेटेन विज़िट ने खोला मेगा वॉटर पार्टनरशिप का रास्ता
17 May 2026. नीदरलैंड दौरे पर प्रधानमंत्री Narendra Modi का एक ऐसा कार्यक्रम सामने आया जिसने सिर्फ कूटनीति ही नहीं, बल्कि भारत के भविष्य के जल और इंफ्रास्ट्रक्चर विज़न की भी झलक दिखा दी। डच प्रधानमंत्री Rob Jetten के साथ पीएम मोदी ने नीदरलैंड की ऐतिहासिक और विश्वप्रसिद्ध जल प्रबंधन संरचना Afsluitdijk का दौरा किया। यह दौरा अब भारत-नीदरलैंड संबंधों में “वॉटर डिप्लोमेसी” के नए अध्याय के तौर पर देखा जा रहा है।
करीब 32 किलोमीटर लंबा अफस्लुइटडिज्क बांध सिर्फ एक इंजीनियरिंग संरचना नहीं, बल्कि समुद्र से लड़कर जमीन और भविष्य बचाने की डच सोच का प्रतीक माना जाता है। उत्तरी सागर की विनाशकारी बाढ़ों से देश को बचाने वाला यह बांध आज भी दुनिया के सबसे सफल फ्लड कंट्रोल मॉडलों में गिना जाता है। इसी मॉडल ने अब भारत की महत्वाकांक्षी Kalpasar Project परियोजना को नई गति देने की उम्मीद जगा दी है।
कल्पसर परियोजना को भारत के सबसे बड़े जल एवं ऊर्जा इंटीग्रेशन प्रोजेक्ट्स में माना जाता है। इसका उद्देश्य समुद्री जल को नियंत्रित कर विशाल मीठे पानी का जलाशय तैयार करना, ज्वारीय ऊर्जा उत्पादन बढ़ाना और परिवहन नेटवर्क को मजबूत करना है।
यात्रा के दौरान भारत के जल शक्ति मंत्रालय और नीदरलैंड के इंफ्रास्ट्रक्चर एवं वॉटर मैनेजमेंट मंत्रालय के बीच तकनीकी सहयोग के लिए आशय पत्र पर सहमति बनी। माना जा रहा है कि डच विशेषज्ञ अब कल्पसर परियोजना के डिजाइन, समुद्री जल नियंत्रण, तटीय सुरक्षा और क्लाइमेट रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारत के साथ मिलकर काम कर सकते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब दुनिया जलवायु परिवर्तन, समुद्री जलस्तर बढ़ने और जल संकट जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में भारत और नीदरलैंड की यह साझेदारी भविष्य की “सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर डिप्लोमेसी” का मजबूत उदाहरण बन सकती है।
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