पीएम मोदी की यात्रा से भारत-नीदरलैंड्स संबंधों को नई गति, सेमीकंडक्टर, व्यापार और सांस्कृतिक विरासत पर बड़ा फोकस
17 May 2026. प्रधानमंत्री Narendra Modi ने अपनी नीदरलैंड्स यात्रा के दौरान Netherlands के प्रधानमंत्री Rob Jetten के साथ मिलकर नीदरलैंड्स की अग्रणी कंपनियों के प्रमुख उद्योगपतियों और सीईओ के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। इस बैठक में ऊर्जा, बंदरगाह, स्वास्थ्य, कृषि व्यापार, लॉजिस्टिक्स और टेक्नोलॉजी जैसे अहम क्षेत्रों पर चर्चा हुई। वह नीदरलैंड्स के प्रधानमंत्री के साथ प्रतिनिधि मंडल स्तर की बातचीत में दोनों देशों के बीच कई अहम क्षेत्रों में समझौते हुए!
नीदरलैंड्स की अग्रणी कंपनियों के प्रमुख उद्योगपतियों और सीईओ के साथ बैठक के दौरान उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने तीन प्रमुख क्षेत्रों सेमीकंडक्टर, टेक्नोलॉजी एवं इनोवेशन; इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स एवं समुद्री सहयोग; तथा सस्टेनेबिलिटी, ऊर्जा और कृषि पर भारत के लिए अपनी रणनीतियों का प्रस्तुतीकरण किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और नीदरलैंड्स के बीच बढ़ते बिजनेस-टू-बिजनेस सहयोग का स्वागत करते हुए कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और सरकार उद्योगों के लिए स्थिर, पारदर्शी तथा भरोसेमंद नीति वातावरण तैयार कर रही है। उन्होंने डच कंपनियों को समुद्री क्षेत्र, हरित ऊर्जा, डिजिटल तकनीक, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश के अवसर तलाशने के लिए आमंत्रित किया।
ASML और Tata Electronics की बड़ी साझेदारी
बैठक से पहले ASML और Tata Electronics के बीच एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता गुजरात के धोलेरा में भारत की पहली फ्रंट-एंड सेमीकंडक्टर फैब परियोजना को समर्थन देने के लिए किया गया है।
प्रधानमंत्री मोदी और डच प्रधानमंत्री रॉब जेटन ने इस साझेदारी का स्वागत करते हुए इसे भारत में मजबूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।

ASML दुनिया की प्रमुख हाई-प्रिसीजन लिथोग्राफी मशीन बनाने वाली कंपनी है, जिसकी तकनीक सेमीकंडक्टर चिप निर्माण के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। वहीं Tata Electronics भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण सुविधाओं के विकास पर तेजी से काम कर रही है।
भारत-EU FTA को जल्द लागू करने पर जोर
दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को जल्द लागू करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। नेताओं ने कहा कि यह समझौता भारत और यूरोपीय संघ को खुले बाजार, समावेशी विकास और मजबूत सप्लाई चेन के भरोसेमंद साझेदार के रूप में और मजबूत करेगा।
डच उद्योगपतियों ने भारत सरकार के सुधार एजेंडे की सराहना करते हुए भारत में अपने निवेश और उपस्थिति को और बढ़ाने में रुचि दिखाई।
11वीं शताब्दी की चोल ताम्र पट्टिकाओं की भारत वापसी
इस दौरे का एक और महत्वपूर्ण क्षण तब आया जब Leiden University Library ने 11वीं शताब्दी की ऐतिहासिक चोल ताम्र पट्टिकाओं को भारत सरकार को औपचारिक रूप से सौंप दिया।
ये ताम्र पट्टिकाएं चोल राजाओं द्वारा जारी किए गए शाही अभिलेख हैं, जिनमें तमिलनाडु के नागपट्टिनम स्थित ‘चूलामणिवर्म-विहार’ को अनैमंगलम गांव दान में दिए जाने का उल्लेख है। इन अभिलेखों में तमिल और संस्कृत दोनों भाषाओं का उपयोग किया गया है।

भारत सरकार ने इसे केवल एक पुरातात्विक धरोहर नहीं, बल्कि भारत की सभ्यता, सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक पहचान का अमूल्य प्रतीक बताया। इन ताम्र पट्टिकाओं की स्वदेश वापसी को देशवासियों के लिए भावनात्मक और गौरवपूर्ण क्षण माना जा रहा है।
डच शाही परिवार से मुलाकात
प्रधानमंत्री मोदी ने हेग स्थित Palace Huis ten Bosch में King Willem-Alexander और Queen Máxima से भी मुलाकात की।

दोनों पक्षों ने भारत-नीदरलैंड्स संबंधों को और मजबूत करने, लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने तथा शिक्षा, नवाचार, डिजिटल तकनीक, जल प्रबंधन, हरित साझेदारी और सेमीकंडक्टर क्षेत्रों में सहयोग को नई गति देने पर चर्चा की।
प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 2019 में डच शाही परिवार की भारत यात्रा को याद करते हुए कहा कि उस यात्रा ने दोनों देशों के संबंधों को नई ऊर्जा प्रदान की थी। डच शाही परिवार ने प्रधानमंत्री मोदी के सम्मान में विशेष भोज का आयोजन भी किया।
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